पेट से निकला विशालकाय साढ़े पांच किलो का ट्यूमर

एक साल बाद मरीज खा सका खाना
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाताः पेट के निचले हिस्से में असहनीय दर्द। ओपीडी में दुबले-पतले मरीज को देखकर कोलकाता मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के डॉक्टर भी हैरान रह गए। मरीज चैतन्य साहा (48) करीब एक साल तक सही ढंग से कुछ नहीं खा पा रहे थे। उत्तर 24 परगना जिले के बीजपुर थाना क्षेत्र के हालीशहर निवासी एक व्यक्ति को पहले लगा कि उसे भोजन से घृणा है। कई स्थानीय डॉक्टरों को दिखाया। उन्होंने पाचन क्रिया की भी काफी दवा ली। लेकिन साल बीतने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। वह समस्या को लेकर कोलकाता मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में पहुंचे। पेट से बेरोल बोल्डर के आकार का मांस। वजन करीब साढ़े पांच किलो। ओपीडी में मरीज की शक्ल देखकर ही डॉक्टर को शक हुआ। ब्रेस्ट इंडोक्राइन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.धृतिमान मैत्र ने पेट के निचले हिस्से का सीटी स्कैन करवाया। डॉक्टरों को लगा कि पेट के अंदर का विशाल ट्यूमर वास्तव में रेट्रोपेरिटोनियल सार्कोमा है। एक तरह का कैंसर। लंबाई में 40 सेमी., चौड़ाई में 35 सेमी., विशाल ट्यूमर ने पूरे पेट में सारी जगह ले ली थी। पित्ताशय की थैली, यकृत ने पेट को एक कोने में धकेल दिया था। ट्यूमर पेट के निचले हिस्से के दाहिने हिस्से में रेट्रोपेरिटोनियम भाग से मिल गया था। डॉ. मैत्रा के अनुसार, ट्यूमर के दबाव के कारण दाहिनी किडनी को भी अपनी स्थिति से हटा दिया गया था जो गंभीर था। यदि शरीर से इतना बड़ा ट्यूमर निकाला जाए तो बहुत अधिक रक्तस्राव होने की संभावना रहती है। इसमें भी 5 घंटे का समय लगता है। इस बात को लेकर शंका थी कि लंबे समय से खाना न खाने वाले मरीज का शरीर तनाव झेल सकता है या नहीं।
विशेष तकनीक से चार से सात सेकेंड के लिए धमनी को सील किया गया
वेसल सीलिंग डिवाइस के रूप में विशेष तकनीक का उपयोग कर डॉ. धृतिमान मैत्रा ने टीम के डॉ. रौनक नंदी, डॉ. शतक्रतु वर्मन, डॉ. हेमव साहा, डॉ. अन्वेश विश्वास, डॉ. केप भट्टाचार्य के साथ सर्जरी के दौरान धमनियों को कुछ सेकेंड के लिए सील दिया। लिगेसर डिवाइस की तकनीक में केवल दो घंटे सर्जरी में लगते हैं। यह तकनीक द्विध्रुवी इलेक्ट्रो-सर्जिकल उपकरणों का उपयोग करती है। कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए हाई वोल्टेज करंट दिया जाता है। सर्जरी के दौरान एक विशेष प्रक्रिया द्वारा धमनियों को 4 से 6 सेकेंड में ‘सील’ किया जा सकता है। यह रक्तस्राव को रोक सकता है। वर्तमान में सर्जरी के बाद मरीज स्वस्थ है। डॉ. मैत्रा के मुताबिक ट्यूमर में कई अहम अंग शामिल थे। मरीज की किस्मत अच्छी थी कि किसी के भी अंग में इतनी खरोंच नहीं आई।

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