पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी से लेकर ममता के मंत्रियों पर छापेमारी तक, जानिए 10 बड़ी बातें

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर उद्योग और वाणिज्य मंत्री पार्थ चटर्जी को ईडी ने गिरफ्तार किया है। पार्थ चटर्जी से करीब 26 घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा ईडी ने उनकी एक करीबी अर्पिता मुखर्जी को भी हिरासत में लिया है। जानिए मामले से जुड़ी बड़ी बातें।
* प्रवर्तन निदेशालय ने पश्चिम बंगाल के मंत्री पार्थ चटर्जी को राज्य में कथित शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी मंत्री की एक करीबी अर्पिता मुखर्जी से 20 करोड़ रुपये बरामद किए जाने के कुछ घंटों बाद हुई।
* ईडी ने कहा कि अर्पिता के परिसरों में छापेमारी के दौरान 20 करोड़ रुपये और 20 से अधिक मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। हालांकि बरामद फोन के उद्देश्य और उपयोग का पता लगाया जा रहा है।
*जांच एजेंसी ने एक बयान में कहा, “उक्त राशि कथित एसएससी घोटाले के अपराध की आय होने का संदेह है।” पार्थ चटर्जी वर्तमान में उद्योग और वाणिज्य मंत्री हैं। जब कथित घोटाला हुआ तब उनके पास शिक्षा विभाग था।
*नकदी की बरामदगी के बाद रात भर तृणमूल नेता से पूछताछ की गई। जांच एजेंसी ने करीब 26 घंटे की पूछताछ के बाद चटर्जी को गिरफ्तार किया। उनकी पूछताछ शुक्रवार सुबह शुरू हुई थी। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कोलकाता के बैंकशाल कोर्ट में पेश किया गया।
*इसके अलावा, ईडी ने शिक्षा राज्य मंत्री परेश अधिकारी, पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष माणिक भट्टाचार्य और अन्य के परिसरों सहित 11 स्थानों पर छापेमारी की। जिन अन्य लोगों पर छापा मारा गया उनमें पार्थ चटर्जी के ओएसडी पीके बंदोपाध्याय, जब वह पहले राज्य के शिक्षा मंत्री थे, उनके तत्कालीन निजी सचिव सुकांत आचार्य, चंदन मंडल उर्फ रंजन, जो कथित तौर पर शिक्षक की नौकरी देने के वादे पर पैसे लेता था।
*इनके अलावा कल्याणमय भट्टाचार्य, कृष्णा सी अधिकारी और पश्चिम बंगाल केंद्रीय विद्यालय सेवा आयोग के सलाहकार डॉ. एसपी सिन्हा के यहां भी छापेमारी हुई।
*तृणमूल कांग्रेस ने अर्पिता मुखर्जी से ये कहते हुए दूरी बना ली है कि उनका पार्टी से कोई संबंध नहीं है। टीएमसी महासचिव कुणाल घोष ने ट्वीट किया, “ईडी द्वारा बरामद धन का तृणमूल से कोई लेना-देना नहीं है। जिन लोगों का नाम इस जांच में है, यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे उनसे या उनके वकीलों से जुड़े सवालों का जवाब दें।”
*बंगाल के स्पीकर बिमान बनर्जी ने कहा कि जांच एजेंसी को विधानसभा के किसी सदस्य को गिरफ्तार करने से पहले स्पीकर को सूचित करना चाहिए। उन्होंने कहा, “ईडी या सीबीआई, किसी भी सांसद या विधायक को गिरफ्तार करते समय लोकसभा या विधानसभा के अध्यक्ष को सूचित करती है। यह संवैधानिक मानदंड है, लेकिन मुझे चटर्जी की गिरफ्तारी के बारे में ईडी से कोई सूचना नहीं मिली।”
*केंद्रीय मंत्री आर चंद्रशेखर ने कहा कि, “सीएम बनर्जी ईडी और सीबीआई के खिलाफ बोलती हैं, लेकिन जब भी ये एजेंसियां राजनीतिक भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करती हैं तो वह चुप रहती हैं। वह कानून प्रवर्तन एजेंसियों को उनकी जांच को विफल करने के लिए डराने की कोशिश करती हैं, इसलिए उनकी सरकार में भ्रष्टाचार का कोई मामला सामने नहीं आता।” उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के एक मंत्री के एक करीबी सहयोगी पर ईडी द्वारा छापेमारी के दौरान इतनी बड़ी राशि मिलना ये पश्चिम बंगाल में राजनीतिक भ्रष्टाचार के बारे में बताता है।
*सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने इन छापों को केंद्र की बीजेपी सरकार द्वारा अपने राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने की चाल करार दिया। इस मुद्दे में किसी भी भूमिका से इनकार करते हुए, बीजेपी ने दावा किया है कि सीबीआई और ईडी सही रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं।

 

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