एक युग के परिचायक थे एवरग्रीन सुब्रत दा !

तृणमूल नेताओं ने कहा, एक योद्धा खो दिया हमने
राजनीति के उत्तम कुमार माने जाते थे सुब्रत मुखर्जी
इंदिरा से लेकर ममता तक के माने जाते थे खास
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कांग्रेस में इंदिरा गांधी से लेकर तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के अति खास सुब्रत मुखर्जी बंगाल की राजनीति में एक युग के परिचायक के रूप में माने जाते रहे। आज उस युग का अंत हो गया। सुब्रत मुखर्जी ऐसे खुश-मिजाज राजनेता थे जिनका सम्पर्क विपक्ष के नेताओं के साथ भी उतना ही मधुर था जितना अपनी पार्टी के नेताओं के साथ। हर कोई उनसे कुछ न कुछ सीखता ही आया ऐसा हुनर था उनमें। आज यानी शुक्रवार को उन्हें अंतिम विदायी देते हुए तृणमूल के तमाम नेता गमगीन थे, उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि उनके जाने का गम कैसे बांटें। उन्हें याद करते हुए उनसे जुड़े नेताओं ने कुछ पल सन्मार्ग के साथ बांटें और बताया आखिर क्या मायने रखते हैं सुब्रत दा उनके लिए।
विधानसभा अध्यक्ष विमान बनर्जी ने कहा कि हमने एक योद्धा खो दिया। सुब्रत मुखर्जी ऐसी श​​ख्सियत थे जिनमें हर तरह की क्षमता थी। वह किसी भी जिम्मेदारी को बखूबी निभाने की क्षमता रखते थे। शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने रुंधी आवाज में कहा कि एक हमउम्र दोस्त चला गया। अब मुझे ‘तुई’ बोलकर पुकारने वाला कोई नहीं है। मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा कि सुब्रत दा हमारे लिए राजनीति के उत्तम कुमार थे। उनसे हमने राजनीति सीखी है। मैं सुब्रत दा को देखकर बड़ा हुआ हूं। वह मेरे बचपन के हीरो थे। ऐसे कई उदाहरण हैं जब मैंने उनसे सलाह के लिए संपर्क किया और उन्होंने हमेशा मेरा मार्गदर्शन किया। मैंने अपने बड़े भाई को खो दिया है। अरूप विश्वास ने कहा कि जो खोया है उसकी पूर्ति कोई नहीं कर सकता है। वे हमारे लिए बहुत कुछ थे। उनका खालीपन हमेशा खलेगा। मदन मित्रा ने कहा कि हम सभी को शिक्षक की जरूरत होती है। हमारे लिए सुब्रत दा राजनीति के शिक्षक थे जिनसे हमने सीखा कि कैसे राजनीति की जानी चाहिए। चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि शब्द नहीं हैं बताने के लिए कि क्या खोया है हमने। वे हमें राजनीति में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहे। डॉ. शशि पांजा ने कहा कि नेता से लेकर मेयर, विधायक और मंत्री हर भूमिका में वह सराहनीय रहे। उनसे हमने कुछ सीखा ही है, आज वे हमारे बीच नहीं रहे, लग रहा है ये हमारे लिए एक बड़ी क्षति है। बेचाराम मन्ना के कहा कि किसान आंदोलन से लेकर कई ऐसे मौके आये जहां उन्होंने हमें दिशा-निर्देश दिये, आज वह नहीं हैं तो लग रहा जैसे हमारा अभिभावक हमसे दूर हो गया है।

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