मुस्लिम इंस्टीट्यूट द्वारा ‘एक शाम अज़हर आलम के नाम’

कोलकाता : मुस्लिम इंस्टीट्यूट द्वारा ‘एक शाम अज़हर आलम के नाम’ का आयोजन किया गया। इस साल से मुस्लिम इंस्टीट्यूट ने एस.एम.अज़हर आलम आवर्ड कि भी घोषणा कि । इसी क्रम में प्रोफेसर नियाज़ अहमद खान आवर्ड 2021 दिल्ली के रहने वाले प्रोफेसर मोहम्मद काज़िम को और एस. एम. अज़हर आलम आवर्ड 2021 रानीगंज के क़मर जावेद को दिया गया। पहले सत्र में वरिष्ट नाटककार और निर्देशकों ने अज़हर आलम के सफ़र को जानने और उनकी बारकियों को समझने के लिए अपने वक्तव्य पेश किया। दूसरे सत्र में मुंबई के नाट्य दल कलाप्रेमी थिएटर ने नाटक सॉरी नॉट फिट पेश किया जिसका निर्देशन शाहज़हां ख़ान ने किया। यह नाटक उन्होंने अज़हर आलम को समर्पित किया। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए स्वागत भाषण में श्री निसार अहमद (माननीय महासचिव, मुस्लिम इंस्टिट्यूट) ने कहा कि अज़हर ने उर्दू-हिंदी नाटकों को बंगाल में ही नहीं बल्कि पूरे देश में लेकर गए, उसे एक नया रंग रूप दिखाया, उर्दू कि पहली ड्रामे कि पत्रिका रंग रस निकाली ,जो उर्दू रंगमंच में अपनी विशेष पहचान रखती है। कोलकाता के हरी मोहन कॉलेज के प्रोफेसर. शेख अलमास हुसैन ने कहा कि जब सफदर हाशमी कि मृत्यु हुई थी तो सब कहते थे कि बहुत बड़ा नुकसान हुआ, वैसा ही नुकसान अज़हर के जाने से हुआ है।कलकत्ता की विख्यात रंगकर्मी और अज़हर आलम कि जीवन संगिनी उमा झुनझुनवाला ने कहा कि हमनें, मतलब अज़हर और मैंने मिलकर जो बीज बोयें हैं वो दरख़्त होंगें, अब अज़हर रूहानी तौर पर हमारे साथ हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मुहम्मद काज़िम ने कहा कि अज़हर आलम थियेटर के जुनून के लिए जाने जाएंगे। अज़हर आलम के नाटकों में न तो उर्दू था न हिंदी था, वहाँ थियेटर दिखता था। उन्होंने अपनी सारी ज़िंदगी थियेटर को समर्पित कर दि थी । नाटककार एवं निर्देशक कमाल अहमद ने कहा कि अज़हर को कभी भी भुला नहीं जा सकता , उनके योगदान से उर्दू थियेटर समृद्ध हुआ है। नाटककार एवं निर्देशक ज़हिर अनवर ने कहा कि अज़हर आलम ने हिंदी-उर्दू रंगमंच के बीच पुल बनाया है, वो अपने ख्वाब से नए ज़माने को देना चाहते थे और दिया भी। अज़हर का वजूद आज भी है, वो मरते नहीं है अमर होते हैं। इस अवसर पर मोजूद थे श्री कमरुद्दीन मल्लिक (नाटक और संगीत उप-समिति, मुस्लिम इंस्टिट्यूट), जनाब साजिद परवेज़ (नाटक और संगीत उप-समिति, मुस्लिम इंस्टिट्यूट)। अज़हर आलम ने जैसे कामों को किया है उसी राह पर चलते हुए थिएटर प्रेमी आगे बढ़ेंगे और थिएटर को एक मुक़ाम देने की पूरी कोशिश करेंगे। अज़हर आलम के स्टूडियो थियेटर का सपना हमें मिलकर पूरा करना है।मुस्लिम इंस्टीट्यूट ने ‘अज़हर आलम के नाम एक शाम’ के माध्यम से अज़हर आलम को हृदय से श्रद्धांजलि दिया उसके लिए उन्हें कला प्रेमियों की ओर से बेहद धन्यवाद

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