पहले कोलकाता में चल रही थीं 7 हजार बसें, अब दो हजार से कम

परिवहन विभाग अधिक से अधिक सीएनजी बसों को संचालित करने की बना रही योजना
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाताः कोविड काल से पहले अकेले कोलकाता में ही करीब 7 हजार निजी बसें और मिनी बसें सड़कों पर चल रही थीं। फिलहाल यह संख्या दो हजार से भी कम हो गई है। बस मालिकों का दावा है कि ऐसा ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी, यात्रियों के कम होने और किराए में बढ़ोतरी न होने के कारण हुआ है। परिवहन मंत्री फिरहाद हकीम ने स्वयं कई बार कहा है कि बिना किराया बढ़ाए डीजल से चलने वाली बसों को हम सीएनजी में बदलने की योजना बना रहे हैं। यही वजह है कि डीजलयुक्त सीएनजी बस को भी उतारा गया है। हालांकि इस ‌पर निजी बस मालिक अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं।
पर्याप्त बसें क्यों नहीं हैं, इस पर वेस्ट बंगाल बस एंड मिनी बस ऑनर्स एसोसिएशन के संयुक्त सचिव प्रदीप नारायण बोस ने कहा कि दिन भर बस चलती रहती है, इसके बाद भी घाटा उठाना पड़ रहा है। डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि से बस मालिक भी परेशान हैं। जरूरत है कि सरकार किराये में वृद्धि करे। बोस ने कहा कि लॉकडाउन के बाद जब बस परिसेवा सामान्य हुई तो 25% व इसके बाद 35% व फिर 50% बसें महानगर की सड़कों पर उतरीं। फिलहाल दुर्गा पूजा की छुट्टी है, इस कारण भी बसें कम हैं। आशा है कि कार्यालयों के खुलने के बाद और बसें बढ़ेंगी।
इसके साथ ही कोविड काल के बाद अब भी लॉकडाउन का असर जारी है। ऑल बंगाल बस मिनी बस समन्वय समिति के महासचिव राहुल चटर्जी ने कहा कि अब भी स्कूल-कॉलेज नहीं खुले हैं, कई दफ्तर पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाए हैं, यानी कई दफ्तरों में अभी भी वर्क फॉर्म होम चल रहा है, नतीजतन, एक तरफ यात्रियों की संख्या कम है, दूसरी तरफ आधिकारिक तौर पर किराए में वृद्धि नहीं हुई है। इस कारण बस चलाने में काफी समस्या आ रही है।
कुछ आंकड़ों पर नजर
कोलकाता में बसें पहले-7500
अब बसें- 2000 ही
मिनी बस- 500 सड़कों पर
निजी बस- 1500

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