निजी बसों के नहीं चलने से ड्राइवरों के सामने रोजी-रोटी का सवाल तो इधर यात्री भी परेशान

बस मालिकों ने कहा, 15 जून का है इंतजार
हावड़ा : कोरोना के बढ़ते प्रकाेप को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से सख्ती लगायी गयी। इसमें लोकल ट्रेनों को छोड़कर सभी ट्रेनों को चलाने की अनुमति दे दी गयी थी, लेकिन धीरे-धीरे काेरोना संक्रमण का प्रभाव जब कम होने लगा तो सरकार की ओर से छूट भी दे दी गयी। इसमें कई प्राइवेट ऑफिस खुल गये। खुदरा दुकानें खुल गयीं लेकिन सवाल यहां आकर खड़ा हो गया कि इन छूटों के साथ ही वे लोग कैसे अपने काम या फिर गंतव्य तक पहुंचेंगे क्योंकि सरकार ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर ताे अभी भी सख्ती ही बरती है। रोड पर टैक्सी व प्राइवेट टैक्सी तो चलती दिखाई दे रही है लेकिन इनका किराया मनमाना है। सभी लोगों का एकमात्र सस्ता साधन है निजी बसें जो कि अब तक बंद हैं। ऐसे में एक ओर बस ड्राइवरों के सामने दिन प्रतिदिन रोजी-रोटी का सवाल खड़ा हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर सबसे ज्यादा परेशानी आम यात्रियों को झेलनी पड़ रही है।
क्या कहना है यात्रियों का
सरकार की ओर से ऑफिस तो खोले गये हैं लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए लोगों के पास साधन नहीं है, क्योंकि एक तरफ लोकल ट्रेनें बंद हैं और दूसरी ओर बसें नहीं चलने से आम लोगों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। इधर जो यात्री दूसरे राज्य से बंगाल आ रहे हैं, उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए डबल किराया तक देना पड़ रहा है। हावड़ा से साल्टलेक जानेवाले रामलाल यादव ने कहा कि वह बिहार से आये हैं परंतु बस नहीं होने के कारण वे शटल में जाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन किराया 500 रुपये मांगा जा रहा है। एक दूसरे यात्री पार्क सर्कस जानेवाले राकेश श्रीवास्तव ने कहा कि वे जेसीडीह से यहां आये हैं लेकिन 1 घंटे से ऊपर हो गया उन्हें हावड़ा स्टशेन के बाहर किसी सवारी का इंतजार करते हुए, लेकिन नुछ मिल नहीं रहा है। इधर टैक्सी वाले ने पार्क सर्कस के लिए 400 रुपये मांगे हैं। वहीं एक ऑफिस जानेवाले संदीप शर्मा ने कहा कि वे रिसड़ा से टोटो करके बाली आते हैं। वहां से प्राइवेट गाड़ी में लिफ्ट मांगकर हावड़ा पहुंचते हैं, परंतु यहां से उन्हें हावड़ा​ ब्रिज पैदल ही पार करना पड़ता है क्योंकि वहां उनकी दुकान है।
क्या कहना है बस ड्राइवरों का
मालीपांचघड़ा-सियालदह रूट के बस ड्राइवरों का कहना है जब से बसें बंद हुई हैं तब से रोजी-रोटी के लिए रोज जुगाड़ लगाना पड़ रहा है। हाल ही में इलाके के विधायक गौतम चौधरी द्वारा हमलोगों को अनाज दिया गया था। इससे कुछ दिन घर में खाना बन पाया लेकिन भुखमरी की स्थिति एक बार फिर खड़ी हो गयी है। वहीं रूट नंबर 71 के एक ड्राइवर ने कहा कि पिछले कई दिनों से संस्था की आेर से दिये जा रहे पके हुए भोजन के ही भरोसे हमलोग हैं।
क्या कहना है बस संगठन का
इस बारे में ज्वाइंट कांउसिल बस सिंडिकेट के जनरल सेक्रेटरी तपन बनर्जी ने कहा कि सरकार की ओर से हमें किसी भी प्रकार की कोई छूट नहीं मिली है। एेसे में हमें 15 जून तक इंतजार ही करना है। वहीं लॉकडाउन होने से कई बस मालिक ऐसे हैं जो दूसरे काम में लग गये हैं और ड्राइवरों के समक्ष भुखमरी की नौबत आ गयी है। पिछले कई महीनों से बंद पड़ी बस का मेंटेनेंस भी अधिक होगा इसलिए संगठन की ओर से लगातार सरकार से बस किराये को बढ़ाने की भी मांग की गयी है। इस पर सरकार ने कहा कि वह इस मामले को देख रही हैं लेकिन कोई सटीक नतीजा सामने नहीं आया है।

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