‘भाजपा को जिताया तो होगा बड़ा नुकसान’

– तृणमूल के बजाय भाजपा का विरोध अधिक जरूरी

कोलकाता : तृणमूल से नाराज होकर भाजपा को जीत दिलाने पर राज्य के लोगों को बड़ा नुकसान हो सकता है। ऐसे में तृणमूल के बजाय भाजपा का विरोध करना वामपंथियों के लिए अधिक जरूरी है। यह कहना है वामपंथी नेता और भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य का। सन्मार्ग से हुई खास बातचीत में उन्होंने कहा कि देश के लिए सबसे बड़ा खतरा फिलहाल भाजपा है और पश्चिम बंगाल में भी भाजपा को जीतने से हर हाल में रोकना होगा। पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े कई और मुद्दों पर भी उन्होंने अपनी राय रखी।

सवाल – बिहार में आपने अच्छा प्रदर्शन किया,लेकिन बंगाल में स्थिति अलग है। आपका मुख्य शत्रु कौन है ?
जवाब – ना केवल वामपंथियों के लिए बल्कि पूरे देश के लिए फिलहाल भाजपा ही सबसे बड़ी शत्रु है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, लेकिन हमें राज्य से अधिक केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ मुखर होने की आवश्यकता है। जिस तरह देश भर में हड़ताल हुआ, किसान दिल्ली मार्च कर रहे हैं, युवा से लेकर महिला व हर वर्ग का केवल एक टार्गेट है भाजपा।

सवाल – अगर तृणमूल से समझौता करने का मौका मिले तो करेंगे ?
जवाब – समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है, क्योंकि तृणमूल सरकार के खिलाफ भी लोगों की नाराजगी है। विधानसभा चुनाव राज्य सरकार के खिलाफ होने वाला है, लेकिन केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध अत्यंत आवश्यक है। केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तुओं से आलू व प्याज को हटाकर जमाखोरी बढ़ायी।

सवाल – वामपंथी किन मुद्दों के साथ जनता के समक्ष जाएंगे ?
जवाब – तृणमूल सरकार के खिलाफ भी काफी मुद्दे हैं। चाहे भ्रष्टाचार हो या गुण्डागर्दी या फिर राजनीतिक हिंसा का मुद्दा हो, लेकिन देश के लिए भाजपा अधिक खतरनाक है। ऐसे में वामपंथियों को दोनों का विकल्प बनना होगा, हमें जनता से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन करने की आवश्यकता है। इनमें रोजगार का मुद्दा, समान काम समान वेतन, किसानों का मुद्दा व अन्य कई ऐसे मुद्दे हैं ​जिन पर तृणमूल से लड़ा जा सकता है।

सवाल – कांग्रेस के साथ समझौता करना कितना सही है। क्या कहेंगे ?
जवाब – 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ समझौते का फायदा कांग्रेस को ही मिला और इसका नतीजा ये हुआ कि कांग्रेस तीसरे और वाममोर्चा चौथे नंबर की पार्टी बन गयी। हालांकि 2021 के विधानसभा चुनाव में समझौता होगा या नहीं, ये अभी स्पष्ट नहीं है।

सवाल – कांग्रेस के साथ जाना क्या मार्क्सवादी विचारधारा के विपरीत नहीं है ?
जवाब – विचारधारा के साथ – साथ यह भी सोचना होगा कि कांग्रेस का संगठन कितना मजबूत है कि उसके साथ मिलकर लड़ा जाए। कुछ सीटों पर तालमेल होने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन समझौते के लिए वामपंथियों को सोचने की आवश्यकता है।

सवाल – क्या तृणमूल को हराने से ज्यादा जरूरी है भाजपा काे जीतने से रोकना ?
जवाब – हमें जनता के मुद्दों पर चुनाव लड़ना होगा और जनता अपने मुद्दों पर वोट करेगी। भाजपा को सत्ता पर कब्जा करने से रोकने की आवश्यकता है, इसके बाद जनता तय करेगी कि कौन रहेगा। हालांकि तृणमूल से नाराज होकर भाजपा को जिताने पर लोगों को बड़ा नुकसान हो सकता है। लोगों को सोचना होगा कि असम व अन्य भाजपा शासित प्रदेशों की क्या हालत है।

 

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