दिनेश के कारण गये थे अर्जुन, अब दिनेश किसके लिये गये ?

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : दिनेश त्रिवेदी ने इस्तीफा देने के दौरान कहा कि पार्टी में उनका दम घुट रहा है, लेकिन उनके इस्तीफे को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। एक तरफ तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर राय का सवाल है कि राज्यसभा में दिनेश त्रिवेदी को बोलने का अतिरिक्त समय क्यों दिया गया ? वहीं दूसरी ओर, दिनेश त्रिवेदी और अर्जुन सिंह के राजनीतिक समीकरण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यह सवाल उठाये जा रहे हैं कि दिनेश त्रिवेदी के कारण अगर अर्जुन सिंह भाजपा में शामिल हुए थे तो अब दिनेश त्रिवेदी ने किस कारण तृणमूल छोड़ दी ?
तृणमूल में रेल मंत्री बने थे दिनेश त्रिवेदी
एक समय में विश्वनाथ प्रताप सिंह के करीबी रहे वरिष्ठ नेता दिनेश त्रिवेदी को ममता बनर्जी तृणमूल में ले आयी थीं। तृणमूल में रहने के दौरान उन्हें देश का रेल मंत्री बनाया गया, लेकिन रेल का किराया बढ़ाने को लेकर ममता बनर्जी उनसे नाराज हो गयी थीं। रेल बजट पेश करने के समय दिनेश त्रिवेदी ने कहा था, ‘रेलवे आईसीयू में चला गया है।’ यहां गौरतलब है कि दिनेश त्रिवेदी से पहले ममता बनर्जी रेल मंत्री थीं। दिनेश के उस बयान के बाद उन्हें रेल मंत्री के पद से हटा दिया गया था।
सब परिचित हैं अर्जुन और दिनेश के राजनीतिक द्वंद्व से
गत लोकसभा चुनाव में बैरकपुर केंद्र से तृणमूल के टिकट से लड़कर दिनेश त्रिवेदी चुनाव हार गये थे और अर्जुन सिंह की जीत हुई थी। ऐसे में अर्जुन और ​दिनेश त्रिवेदी के बीच राजनीतिक द्वंद्व से सब भलीभांति परिचित हैं। हालांकि दिनेश त्रिवेदी के तृणमूल छोड़ने की बात सुनकर पूर्व राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी का अर्जुन ने भाजपा में स्वागत किया है। यहां उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 में दिनेश त्रिवेदी ने बैरकपुर की सीट से चुनाव जीता था। 2019 में उस सीट पर अर्जुन सिंह ने दावा किया। ऐसे में दोनों की रस्साकसी के बीच ममता बनर्जी ने दिनेश त्रिवेदी को ही प्रमुखता दी थी। टिकट नहीं मिलने से नाराज अ​र्जुन सिंह भाजपा में शामिल हो गये थे और उन्होंने तृणमूल के टिकट से लड़ रहे दिनेश त्रिवेदी को हराया था।
हारने के बाद दिनेश को भेजा गया था राज्यसभा
बैरकपुर से चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी ने दिनेश त्रिवेदी को राज्यसभा में भेजा था। दिनेश और अर्जुन के बीच चल रहे विवाद के दौरान तृणमूल के कई नेताओं ने कहा था कि पार्टी को अर्जुन को ही बैरकपुर से टिकट देकर दिनेश को किसी दूसरी लोकसभा सीट से लड़वाना चाहिये था। हालांकि उस समय ऐसा नहीं हुआ और आज वही दिनेश तृणमूल छोड़ चुके हैं। इसके साथ ही उनके भाजपा में जाने की चर्चा काफी तेज हो गयी है। एक समय में दिनेश त्रिवेदी तृणमूल का ‘चेहरा’ थे। विभिन्न कूटनीतिक परिस्थितियों में राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी ममता बनर्जी उनका उपयोग करती थीं।
अब तक 11 तृणमूल विधायकों ने भाजपा का हाथ थामा
बंगाल में पिछले 2 महीने में 11 तृणमूल नेताओं ने भाजपा का हाथ थामा है। तृणमूल छोड़कर भाजपा ज्वाइन करने का सिलसिला गत 19 दिसंबर से तेज हुआ। तब शुभेंदु अधिकारी के साथ सांसद सुनील मंडल, पूर्व सांसद दशरथ तिर्के और 10 विधायक भाजपा में आ गए थे।
1 साल पहले ली थी सदस्यता
दिनेश त्रिवेदी ने पिछले साल अप्रैल महीने में राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण की थी। त्रिवेदी ने वर्ष 1980 में कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की थी। इसके बाद वर्ष 1990 में वह जनता दल के साथ चले गए थे। वर्ष 1998 में ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस बनायी तो त्रिवेदी भी उनकी पार्टी में शामिल हो गए।

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