ऐसे सजेगा दीघा

ममता ने सिंचाई विभाग पर जताई नाराजगी
कहा, ठीक से नहीं किया गया काम
दुआरे त्राण को लेकर बोली, चक्रवात प्रभावित इलाकों में ही लगेंगे कैंप
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : यास तूफान ने राज्य के कई हिस्सों को लगभग तबाही के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। उन्हीं इलाकों में एक है दीघा जिसे पर्यटन की दृष्टि से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सजाया संवारा गया था। दीघा घूमने वालों को यहां की खूबसूरती काफी रास आई थी मगर इस तूफान में सब कुछ बर्बाद कर दिया। दोबारा दीघा को किस तरह सजाना है, उसके सुझाव खुद ममता बनर्जी ने सोमवार को दिया। ममता बनर्जी ने बताया कि दीघा का करीब 7 किलोमीटर रास्ता पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है, उसे अच्छी तरह से बनाना है। पर्यटकों के बैठने के लिए जो कुर्सियां लगी थी वह समुद्र की तलहटी में चली गई है, इसलिए नए सिरे से उन्हें सजाना होगा। समुद्र के करीब कंक्रीट बैठाया गया था उसे अच्छी तरह जमीन खोदकर दोबारा बैठाना होगा। पानी का बहाव रोकने के लिए जरूरत पड़ी तो चक्रवात में जो पेड़ गिर चुके हैं उनकी टहनियों को वहां इस तरह से रखना होगा जो देखने में भी खूबसूरत लगे। दीघा में लंबित पड़े ब्रिज का निर्माण कार्य जल्द पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री ने दिशा निर्देश दिए हैं। इसके अलावा आसपास जितने गांव हैं वहां तूफान के पानी के कारण जमा पानी को जल्द बा बाहर निकालना और वहां की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश ममता ने दिया है। उन्होंने बताया कि वह खुद वहां गई थी और देखा कि वहां के गांव के गांव पूरी तरह से डूब चुके हैं। इतना ही नहीं आसपास के और भी जो इलाके है और उनकी स्थिति खराब है वहां की स्थानीय प्रशासन जल्द से जल्द तस्वीर को सुधारें। दीघा में समुद्र किनारे जिन की दुकानें थी वह भी पूरी तरह से बर्बाद हो गई है उन्हें दोबारा से उसी तर्ज पर तैयार करने का निर्देश सीएम ने दिया है। इन सभी कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए ममता ने कहा है ताकि टूरिज्म किसी तरह से प्रभावित ना हो।
सिंचाई विभाग पर जताई नाराजगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि दीघा की सड़कों से लेकर बाकी जगह जो भी सिंचाई विभाग द्वारा काम किया गया है वह बिल्कुल ठीक नहीं है। काम पूरा हो जाए इसलिए उसे किया गया है जबकि वहां पक्के स्तर पर काम करने की जरूरत है। इस बार उसी तरह वहां काम होना चाहिए, सड़कों पर स्पीच नहीं बल्कि उसे अच्छी तरह बनाने का निर्देश ममता ने दिया।
नुकसान हुए इलाके में ही लगेंगे दुआरे प्राण के कैंप
ममता ने कहा कि चक्रवात में जिन लोगों को नुकसान हुआ है उन्हें सरकारी सहायता देने के लिए दुआरे त्राण के कैंप लगाए जाएंगे। यह कैंप किसी पालिका या जीपी में नहीं लगेंगे बल्कि स्थानीय स्कूल कॉलेज या पब्लिक बिल्डिंग में लगाया जाएगा ताकि लोगों को सही तरीके से सरकारी सहायता दे दी जाए। इसके लिए जो भी आवेदन होगा लाभार्थी एसडीओ या बिडिओ के पास ही करेंगे।
चक्रवात से हुआ कुछ इस तरह का नुकसान
कुल नुकसान : करीब 20 हजार करोड़
राहत कैंप लगाए गए : 1200
राहत शिविर में लोग : करीब 2 लाख
नदी बांध नुकसान हुए : 329
कृषि जमीन खराब हुई : 2.21 लाख हेक्टेयर
बागवानी की जमीन खराब हुई : 71 हजार 560 हेक्टेयर
लोगों तक पाउच पानी दिया गया : 45 लाख

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