मच्छर को किया ऐसा घनचक्कर, चाहे जितना काटे नहीं होगा डेंगू!

कोलकाता : कोरोना वायरस की दूसरी लहर अब काफी कंट्रोल में है लेकिन ब्लैक फंगस का कहर फिर भी जारी है। इन्हीं गंभीर हालातों को ध्यान में रखते हुए सरकार की ओर से स्वास्थ्य विभाग ने अब बारिश में आने वाली डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की बीमारी को लेकर अलर्ट जारी किया है। ताकि समय रहते लोग इस तरह की बीमारियों से अपना बचाव कर सकें। जैसा कि आप जानते ही हैं हर साल सैकड़ों लोगों की मौत डेंगू की वजह से होती है। हालांकि, इसी बीच डेंगू के मामलों को लेकर एक अच्छी खबर आई है।  दरअसल, वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्राउंडब्रेकिंग ट्रायल के तहत डेंगू बुखार के मामलों में 77 फीसद कमी देखने को मिली है। वैज्ञानिकों ने डेंगू फैलाने वाले मच्छरों में हेरफेर कर सफलता मिलने का दावा किया है। आइए, जानते हैं कि आखिर डेंगू के मामले इतनी कमी आखिर कैसे आई और क्या हैं इसके कारण
​ट्रायल में किया गया चमत्कारी मच्छरों का प्रयोग
वैज्ञानिकों ने जानलेवा वायरस से लड़ने में बड़ी कामयाबी हासिल की है। इंडोनेशिया के योग्याकार्ता शहर में परीक्षण शुरू कर वायरस को खत्म करने की उम्मीद में अन्य जगहों पर भी ये तरीका अपनाया जा रहा है। वर्ल्ड मॉस्किटो प्रोग्राम टीम का कहना है कि यह एक इस तरह के ट्रायल से वायरस को पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है जो दुनिया भर में फैल चुका है। वैज्ञानिकों ने इस वैक्टेरिया को ‘चमत्कारपूर्ण’ बताया है।
कैसे कम हुए डेंगू के मामले
डेंगू के संक्रमण को कंट्रोल में लाने के लिए वैज्ञानिकों ने ट्रायल मच्छरों को एक खास वैक्टेरिया से संक्रमित करवाया या कहें कटवाया। जिस मच्छर के जरिए डेंगू फैलता है उसे वैज्ञानिकों ने ‘वॉलबाचिया’ नाम के एक बैक्टीरिया से संक्रमित करवाया। मामले को लेकर डॉक्टर केट एंडर्स ने बताया कि बैक्टीरिया मच्छरों को नुकसान नहीं पहुंचाता। जानकार का कहना है कि ये बैक्टीरिया मच्छर के शरीर के उस हिस्से में रहता है जहां डेंगू वायरस रहते हैं। इससे वायरस को रेप्लिकेट करना मुश्किल हो जाता है यानी वे किसी व्यक्ति पर दोबारा अटैक नहीं कर पाते। ऐसे में मच्छर के काटने के बाद भी संक्रमण नहीं होता है। इसीलिए वैज्ञानिक इसे चमत्कारी वैक्टीरिया कह रहे हैं।
​हॉस्पिटल जाने से बच गए 86 फीसदी लोग
परीक्षण में हैरान कर देने वाले नतीजे सामने आए हैं। जानकारी के लिए बता दें कि ट्रायल में ‘चमत्कारी’ बैक्टीरिया से संक्रमित मच्छरों का प्रयोग किया गया था, जो कीटाणु के डेंगू फैलाने की क्षमता को कम करते हैं। ट्रायल के बाद डेंगू के संक्रमण की संख्या में 77 फीसदी तक की कमी आई है। जबकि 86 फीसदी लोगों को हॉस्पिटल नहीं जाना पड़ा। ​हर साल विश्व के 40 करोड़ लोग होते हैं डेंगू का शिकार आपको बता दें कि आज से करीब 50 साल पहले बहुत कम लोगों ने डेंगू का नाम सुना था। लेकिन हाल के सालों में इस वायरस ने पूरी दुनिया में तबाही मचा रखी है। जानकारी के मुताबिक, साल 1970 में ये सिर्फ 9 देशों में फैला था लेकिन अब हर साल दुनिया भर से करीब 40 करोड़ संक्रमण के मामले सामने आते हैं। डेंगू को ‘ब्रेक बोन फीवर’ यानी हड्डी तोड़ बुखार भी कहा जाता है। तेज बुखार और मांसपेशियों दर्द के चलते लोगों को कई बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है।

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