कोरोना की त्रासदी के बीच देवदूत बने आक्सीजन प्लांटों में मांग 3 गुना बढ़ी

सिलीगुड़ी और आसपास के आक्सीजन प्लांटों में दिन रात हो रहे हैं काम
आक्सीजन प्लांटों की पहली प्राथमिकता उत्तर बंग मेडिकल कालेज सह अस्पताल है
इसके बाद शहर के अस्पतालों और नर्सिंगहोम को की जा रही है आपूर्ति
हर जगह मांग बढ़ी जिसके कारण आपूर्ति में भी पहुंच रही है बाधा
ऑक्सीजन की कालाबाजारी पर ड्रग्स कंट्रोल विभाग की पैनी नजर
मानवता का ख्याल रखें आक्सीजन आपूर्तिकर्ताः डॉ. सुशांत राय
विशाल गोस्वामी
सिलीगुड़ीः कोरोना की इस त्रासदी में आक्सीजन प्लांट देवदूत साबित हो रहे हैं। सिलीगुड़ी जैसे छोटे शहर में भी आक्सीजन की मांग 3 गुना बढ़ गयी है। इसे पूरा करने के लिए यहां के तीन आक्सीजन प्लांट युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं। इनमें लिंडे आक्सीजन प्लांट, एमपीसी आक्सीजन प्लांट और सोना आक्सीजन प्रमुख हैं।
इन आक्सीजन प्लांटों से मेडिकल कालेज सहित विभिन्न नर्सिंगहोम में आक्सीजन भेजे जा रहे हैं। लिंडे आक्सीजन प्लांट के आपूर्ति विभाग के प्रमुख शुभेन्दु कुमार साहा ने बताया कि यहां हम 24 घंटे काम कर रहे हैं। हमारी प्राथमिकता अभी सबसे पहले उत्तर बंगाल मे‌डिकल कालेज सहित सरकारी अस्पताओं को आक्सीजन की आपूर्ति करना है क्योंकि वहां निःस्वार्थ भाव से निःशुल्क लोगों की सेवा की जा रही है। इसके बाद हम शहर के अन्य नर्सिंगहोम को आक्सीजन की आपूर्ति कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हमारी क्षमता से अधिक डिमांड होने के कारण हमें काफी सोच समझ कर अभी आक्सीजन सिलेंडरों की आपूर्ति करनी पड़ रही है। इसके बावजूद हमारी कोशिश रहती है कि सभी अस्पतालों और नर्सिंगहोम को उनकी खपत के अनुसार आक्सीजन प्रदान किये जायें। उन्होंने बताया कि हमारे पास लिक्विड आक्सीजन आता है जिसे हम रेडी टू यूज फार्म में बदल कर आपूर्ति करते हैं।
बताया जाता है कि महज पिछले पंद्रह दिनों से सिलीगुड़ी और आसपास के क्षेत्रों में आक्सीजन की मांग काफी बढ़ गयी है। यह वृद्धि दर लगभग 300 फीसदी से भी अधिक है।
वहीं उत्तर बंगाल मेडिकल कालेज में आक्सीजन की बढ़ती मांग को देखते हुए तृणमूल नेता गौतम देब ने मेडिकल कालेज परिसर में ही आक्सीजन प्लांट लगाने के लिए वहां पूरी व्यवस्‍था करने की बात कही। इसके अलावा सिलीगुड़ी और आसपास के आक्सीजन उत्पादन करने वाले संयंत्रों को भी उन्होंने आक्सीजन उत्पादन में बढ़ोतरी की बात कही।
उल्लेखनीय है सिलीगुड़ी में आक्सीजन की सर्वाधिक खपत उत्तर बंगाल मेडिकल कालेज में है जहां विभिन्न वार्डों के साथ साथ अभी कोविड वार्ड में भी आक्सीजन की भारी मांग है। इसके अलावा शहर के नर्सिंगहोम में भी कोविड के मरीज रखे गये हैं। शहर के एक बड़े नर्सिंगहोम के संचालक ने बताया कि यहां भर्ती मरीजों को सांस की अधिक तकलीफ के कारण ही लाया गया था। अगर सांस की अधिक तकलीफ नहीं है तो हम स्वयं मरीजों को होम आइसोलेशन में रहने की सलाह देते हैं। इसके बावजूद उनकी हालत अगर अधिक खराब है और सीटी स्कैन में फेफड़े में संक्रमण ज्यादा दिखता है तभी उनकी भर्ती ली जाती है और उसके बाद से ही मरीज को आक्सीजन की लगातार जरूरत पड़ती है।
वहीं उत्तर बंगाल मेडिकल कालेज के अधीक्षक ने बताया‌ कि यहां कोविड के अलावा भी आईसीयू, आईटीयू सहित अन्य वार्डों में अभी मरीज भरे हुए हैं जिन्हें निरंतर आक्सीजन देना जरूरी है इसलिए यहां एक मिनट के लिए भी इन वार्डो में आक्सीजन की आपूर्ति रोकी नहीं जा सकती। लिहाजा यहां स्टॉक देखते हुए निरंतर आक्सीजन की आपूर्ति करना बाध्यतामूलक है।
ऑक्सीजन की कालाबाजारी पर ड्रग्स कंट्रोल विभाग की पैनी नजर: दार्जिलिंग जिले के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ प्रलय आचार्य ने कहा कि ऑक्सीजन की कालाबाजारी ना हो इसके लिए तगड़े इंतजाम किये गये हैं। उन्होंने बताया कि ऑक्सीजन के उत्पादन से लेकर डिलीवरी पर भी ड्रग कंट्रोल विभाग के अधिकारी पैनी नजर रख रहे हैं। डॉ आचार्य ने बताया कि फिलहाल मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की मांग बढ़ी है लेकिन हमारे पास पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द मेडिकल कॉलेज का अपना ऑक्सीजन प्लांट होगा। पीएचईडी विभाग इस काम को अंजाम देगा। ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए पीएचईडी के इंजीनियरों ने निरीक्षण के काम को भी पूरा कर लिया है।
मानवता का ख्याल रखें आक्सीजन आपूर्तिकर्ताः उत्तर बंगाल में कोरोना की रोकथाम को तैनात ओएसडी डाक्टर सुशांत राय ने बताया कि ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ताओं से मानवता का ख्याल रखने की अपील की। उन्होंने कहा यह दुर्भाग्यजनक है कि शहर में 5 हजार रुपये के ऑक्सीजन को 20 हजार रुपये में बेचे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन की कमी को दूर करने का प्रयास लगातार जारी है।
उन्होंने लोगों से बेवजह आक्सीजन घरों में जमा नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज जो हालात हैं उसे देखते हुए अस्पतालों और नर्सिंगहोम में आक्सीजन की उपलब्‍धता जरूरी है।
उन्होंने बताया कि भविष्य को देखते हुए स्वास्‍थ्य विभाग के तत्वावधान में उत्तर बंगाल के लगभग हर बड़े सरकारी अस्पतालों में आक्सीजन प्लांट लगाने का काम किया जायेगा। उन्होंने बताया कि केवल जलपाईगुड़ी में ही आक्सीजन के तीन प्लांट लगाये जा रहे हैं।

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