डे वन : प्लास्टिक पर शुरू हुई रोक

कई लोगों को पता ही नहीं प्लास्टिक पर पाबंदी का मतलब
अभी भी दुकानों में इस्तेमाल हो रहे प्लास्टिक का गिलास
विकल्पों को जगह लेने में अभी भी लगेगा वक्त
सोनू ओझा
कोलकाता : सिमटे हुए विकल्पों को लेकर देशभर में सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगा दी गयी है। शुक्रवार को पाबंदी का पहला दिन रहा, पहले तो लगा लोग जागरूक होते हुए सिंगल यूज प्लास्टिक का बहिष्कार करेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं। हो भी कैसे जागरूकता की कमी बोले या विकल्पों की कमी लोगों की जरूरत में यह प्लास्टिक इस कदर समा गया है कि इसे अपनी आदत से दूर करना संभवत: समय मांगेगा। इन सब से बड़ी बात है कि प्लास्टिक के बैन पर इस बार सख्ती इतनी है कि मैन्युफैक्चिरिंग यूनिट तक बंद कर दी है जिसकी वजह से इस उद्योग से जुड़े लोगों के लिए भी बड़ा चैलेंज आ गया है। बहरहाल सरकार का फोकस प्लास्टिक को बंद कर पर्यावरण को बचाना है जिसे लेकर आम लोगों में जागरूकता की कमी साफ दिख रही है। इस प्रयास में कई संस्थाएं जुटी है जो लोगों को बता रही है कि सिंगल यूज प्लास्टिक पर्यावरण के लिए कितना घातक है।
लोगों की गलतफहमी, बंद तो पॉलिथीन है ग्लास नहीं
प्लास्टिक बैन के पहले दिन जब बाजारों में इस ​नियम को मानने वालों की राय ली गयी तो अनमें से कई लोगों को तो पता ही नहीं था कि आखिर सरकार ने बंद क्या किया है। जूस की दुकान में प्लास्टिक के ग्लास में ग्राहकों को जूस दिया जा रहा है, पूछने पर कि ये ग्लास आज क्यों तो जवाब मिलता है मैडम बंद तो पॉलिथीन हुआ है ये तो ग्लास है। वहीं चाय की चुस्कियां ले रहे लोगों से लेकर चायवाले तक का कहना है कि लिखा कहां है कि ये प्लास्टिक हानिकारक है। ऐसे कई उदाहरण आपको भी चलते फिरते मिल जाएंगे।
खर्चें बढ़ेगे, समय लगेगा
प्लास्टिक को रिप्लेस करने में समय लगेगा यह तो तय है, इसके पीछे पहली वजह अधिक खर्च और विकल्पों की कमी है। किराने से लेकर बाकी दुकानों में तो दुकानदारों को राहत है कि ग्राहकों को घर से थैला लाना होगा लेकिन छोटी मोटी दुकान जहां प्लास्टिक के ग्लास से लेकर प्लेट, चम्मच का इस्तेमाल होता है वहां शॉपकीपर परेशान है। उनका कहना है कि मिट्टी के बर्तन का उपयोग करते है तो वह महंगा पड़ेगा। दूसरा ऑप्शन अगर नहीं मिलता है तो स्टील के बर्तनों का प्रयोग करेंगे क्योंकि कमाई पहले है जो खर्चें से अधिक होनी चाहिए।
प्लास्टिक रोकने की कुछ अच्छी पहल
* देश में सिक्किम पहला राज्य है, जिसने वर्ष 1998 में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया और सख्ती से नियमों को मनवाता आ रहा है।
* प्लास्टिक पॉल्यूशन को रोकने के लिए सार्वजनिक स्थलों से लेकर नेशनल मॉन्युमेंट यहां तक कि जंगल और नदी व समंदरों की बराबर सफाई की जाती है।
* केरल में 28 मछुआरों की टीम ने जिम्मा उठाया है जो समुंदर से प्लास्टिक वेस्ट निकालते है। सरकार ने इस प्रयास से 10 महीने में करीब 25 टन प्लास्टिक वेस्ट निकाला है।

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