चक्रवाती तूफान ‘यास’ से मौसुनी द्वीप का टूरिज्म व्यवसाय चौपट

रामबालक दास

करोड़ाें रुपए का नुकसान व हजारों लोग हुए बेराेजगार
दक्षिण 24 परगना : चक्रवाती तूूफान ‘यास’ ने सुंदरवन के नदी तटवर्तीय इलाके में जो तबाही मचाई है, उससे सुंदरवन सहित कई इलाकों की हालत बदतर हो गई है। इस वजह से यहां की आर्थिक स्थिति पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। इससे उबर पाना यहां के लोगों के लिये काफी मुश्किल है। सुंदरवन के नदी तटवर्तीय इलाके मौसुनी नदी द्वीप में टुरिज्म के व्यवसाय से जुड़े टेंट कैंप यास के कहर से पूरी तरह ध्वस्त हो गये। सन् 2018 में दो टेंट कैंप के सहारे यहां पर टूरिज्म व्यवसाय की शुरुआत हुई थी। धीरे-धीरे यहां पर वीकेंड के दिनों में पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ने पर इस द्वीप में वर्तमान समय में करीब 56 टेंट कैंप रिसॉर्ट बन चुके हैं। यास तूफान की चपेट में आकर करीब 50 कैंप पूरी तरह तहस-नहस हाेकर बर्बाद हो चुके हैं। इसके अलावा बकखाली के पर्मानेंट होटलों में लॉकडाउन की वजह से इलाका पर्यटक शून्य हो गया। इससे उन्हें करोड़ाें रुपए का घाटा हो रहा है। इलाके में सुंदरवन मामले के मंत्री बंकिम चंद्र हाजरा ने द्वीप इलाके में पहुंचकर टू‌रिज्म पेशे से जुड़े लोगों से मुलाकात कर आर्थ‌िक मदद का आश्वसन दिया था।
एक नजर मौसुनी द्वीप पर :
यह नदी द्वीप सागर विधानसभा के नामखाना ब्लॉक के अधीन अवस्थित है। यहां पर करीब 29 हजार लोगों का निवास है, जहां पर पर्यटक वीकेंड में आकर आनंद का उपभाेग करते थे। मौसुनी नदी द्वीप के सल्टघेरी लगभग 2 किलोमीटर तक यूको-टूरिज्म के तौर पर विख्यात है। यह नदी द्वीप पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। द्वीपवासी पहले खेती व मछली के पेशे से जुड़े थे। यहां पर टूरिज्म के व्यवसाय में बढ़ोतरी होने पर लोगों का झुकाव इस तरफ बढ़ा। यहां पर पर्यटकों की भीड़ को देखते हुए यह व्यवसाय काफी फल फूल रहा था। पिछले साल अम्फान की चपेट से यह व्यवसाय कुछ संभल चुका था, मगर चक्रवाती तूफान यास ने इसे बुरी तरह बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया।
हजारों लोग हुए बेराेजगार :
मौसुुनी द्वीप में चक्रवाती तूफान यास की वजह से हजारों स्थानीय निवासी बेरोजगार हो चुके हैं। उन्हें सरकार की ओर से कम्यूनिटी किचन के तहत भोजन मुहैया करवाया जा रहा है।
क्या कहना है मौसुनी कैंप ओनर्स एसोसिएशन से जुड़े लोगों का :
मौसुनी कैंप ओनर्स एसोसिएशन के सचिव शुभोजित सरखेल और अध्‍यक्ष चयन भट्टाचार्य ने संयुक्त रूप से कहा कि मौसुनी टूरिज्म उद्योग में इस तरह की क्षति पहले नहीं हुई थी। इस तरह सरकार यदि पहले ही नदी बांंध कंक्रीट की बनाती तो क्षति को कम किया जा सकता था। टूरिज्म पेशे को दुबारा पटरी पर लौटाने के लिए सरकार से आर्थिक मदद की गुहार लगाई गयी है।

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