देश की पहली ग्रीन यूनिवर्सिटी बंगाल के तारकेश्वर में

* करीब 200 करोड़ का प्रोजेक्ट
* लगभग 2.5 सालों में तैयार हो जायेगी रानी रासमणि ग्रीन यूनिवर्सिटी
* हिन्दी सहित 7 विषयों की होगी पढ़ाई, आगे और विषयों को भी जोड़ा जायेगा
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य सरकार के शिक्षा विभाग ने शिक्षा जगत के लिए एक और गौरवमयी कदम उठाया है। देश की पहली ग्रीन यूनिवर्सिटी रानी रासमणि ग्रीन यूनिवर्सिटी बंगाल के तारकेश्वर में तैयार हो रही है। सीएम ममता बनर्जी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक यह भी है। इसका काम शुरू हो गया है। इस यूर्निवर्सिटी पर लगभग 194 से 200 करोड़ खर्च होने की उम्मीद जतायी गयी है। पीडब्ल्यूडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सन्मार्ग को बताया कि यूनिवर्सिटी के इंफ्रास्ट्रक्चर का काम शुरू हो गया है। हमलोग उम्मीद करते हैं कि ढाई से तीन सालों में एकेडमिक बिल्डिंग का काम पूरा कर लिया जायेगा।
क्या कहना है वाइस चांसलर का
रानी रासमणि ग्रीन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. आशुतोष घोष ने सन्मार्ग से खास बातचीत में बताया कि रानी रासमणि ग्रीन यूनिवर्सिटी देश की पहली ग्रीन यूनिवर्सिटी है। यह यूनिवर्सिटी अन्य यूनिवर्सिटी से बेहद ही कई मायनों में अलग और खास होगी। वीसी ने कहा कि राज्य सरकार ने इस ग्रीन यूनिवर्सिटी के लिए बेहद ही अलग रूपरेखा तैयार की है।
किन-किन विषयों की होगी पढ़ाई
2020 से यहां शिक्षा वर्ष शुरू हो चुका है। वीसी ने बताया कि वर्तमान में एनवायरमेंटल साइंस, केमेस्ट्री की पढ़ाई ऑनलाइन जारी है। अगर ऑफलाइन कक्षाएं होती हैं तो सिंगुर गवर्नमेंट कॉलेज व तारकेश्वर डिग्री कॉलेज में पढ़ाई होगी। वहीं इस साल से अंग्रेजी, बंगला, कम्प्यूटर साइंस, न्यूट्रिशन एंड पब्लिक हेल्थ विषयों की भी पढ़ाई हो सकेगी। रानी रासमणि ग्रीन यूनिवर्सिटी का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर व भवन तैयार होने के बाद हिन्दी की भी पढ़ाई की जा सकेगी। वीसी ने बताया कि इस यूनिवर्सिटी में इंफ्रास्ट्रक्चर व कोर्स दोनों पर ही विशेष अलग होंगे। छात्रों के लिए पर्यावरण की पढ़ाई जरूरी होगी। उन्हें आपदा, बाढ़, तूफान इत्यादि की पढ़ाई करायी जायेगी।
क्या खासियत होगी रानी रासमणि ग्रीन यूनिवर्सिटी की
* पर्यावरण रक्षा पर विशेष जोर दिया गया है
* जी प्लस 7 तल्ले की एकेडमिक बिल्डिंग होगी
* प्रदूषण न फैले इसके लिए कैंपस के भीतर गाड़ी की मनाही होगी
* अधिक से अधिक साइकिल का होगा इस्तेमाल
* बिल्डिंग में कुल इलेक्ट्रिसिटी में से 25 % सौर ऊर्जा के इस्तेमाल पर जोर
* कैंपस बिल्डिंग को इस तरह से तैयार किया जायेगा ताकि दिन में लाइट की जरूरत न हो
* नल के पानी का कम से कम इस्तेमाल पर जोर दिया जायेगा और वर्षा का पानी रिसाइकिल कर इस्तेमाल किया जायेगा
* कैंपस में प्लास्टिक इस्तेमाल पर प्रतिबंध

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