शरीर से पहले दिमाग को बीमार कर रहा है कोरोना का यह वेरिएंट

चिंता और सवालों से घिरे दिमाग की कड़ियों को कमजोर कर रहा है वायरस
टेली मेडिसिन और साइक्लॉजिकल काउंसिलिंग की बढ़ रही है मांग
पिछले कोरोना से ज्यादा मानसिक दबाव देने वाला है वायरस का यह रूप
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : ट्रिपल म्यूटेशन वेरिएंट कोरोना के वायरस की यह लहर शरीर के लिए जितनी घातक है उतनी ही दिमाग के लिए खतरनाक। लक्षणों को अपने में छिपाएं वायरस का यह रूप कब किस पर हावी हो जाएं यह एक्सपर्ट भी बताने में असमर्थ से हो गये है। अस्पतालों में बेड नहीं, ऑक्सीजन नहीं, मौत के बढ़ते मामले और इसी तरह की नाकारात्मक खबरों के बीच एक स्वस्थ इंसान भी खुद को बीमार मान बैठ रहा है। लगभग हर कोई यह वहम पाले हुए है कि वह किसी न किसी रूप में इस वायरस की चपेट में आ गया है। इसकी वजह कुछ और नहीं बल्कि कोरोना का अत्यंत खौफ है जो शरीर से पहले इंसान के दिमाग को बीमार कर रहा है। इससे बचने के लिए बेहतरीन उपाय साइक्लॉजिकल काउंसिलिंग है जिसका इस दौर में अच्छा-खासा उपयोग भी किया जा रहा है। इसके साथ ही लोग टेली मेडिसीन की भी मदद ले रहे है जो उन्हें संकट की इस घड़ी में हो रहे मानसिक परेशानी से उभारने में रामबाण साबित हो रहा है। यह व्यवस्था सरकार की ओर से चालू की गयी है जिसमें टेली मेडिसीन में रोजाना करीब 1500 तथा टेली साइक्लॉजिकल काउंसिलिंग में 1000 लोग फोन कर परामर्श ले रहे है।
हर उम्र के लोग हो रहे इस खौफ का शिकार
जाने माने मनोचिकित्सक देवाशिष राय बताते है कि यह कोरोना पिछले बार की तुलना में अधिक खतरनाक है। चूंकि एक बार लोग इस महामारी को झेल चुके है और सबसे बड़ी बात अभी उससे उभर ही रहे थे कि दोबारा इस वायरस ने पैर पसारना शुरु कर दिया। ऐसे में लोग कई सवालों को अपने अंदर समेटे परेशान हो रहे है जो उन्हें मानसिक रूप से बीमार कर रही है। इस खौफ बच्चों से लेकर युवा व उम्र दराजों को डरा रहा है।
दिमाग स्वस्थ रखना है तो रखे इन बातों का ध्यान
किसी भी बात से आंतकित न हो
बेवजह की या कह सकते है गलत खबरों को नजरअंदाज करें
कोविड के नियमों को मानें
सही तरीके से मास्क पहनें
सैनिटाइजर का बराबर इस्तेमाल करें
हाथों की सफाई बेहद जरूरी है कम से कम दो मिनट तक
फिजिकल डिस्टेंस का बनाएं रखें
पुरानी बीमारी का बराबर और सही इलाज जारी रखें
एंटीबायोटीक से बचें
काउंसलिंग में 50 फीसदी मामले युवाओं के
यह सही है कि कोरोना का खौफ दिमागी रूप से कमजोर बना रहा है। एक्सपर्ट्स जिस तरह दावे कर रहे है कि इसका शिकार युवा अधिक है तो लाजमी है कि युवाओं के मन में सवाल अधिक होंगे कोरोना को लेकर। डॉ. रॉय की माने तो 50 फीसदी मामले युवा और वयस्क लोगों के आ रहे है जो कोरोना संबंधित काउंसिलिंग कर रहे है। इसके विपरीत 30-50 प्रतिशत लोग ऐसे है जो काउंसिलिंग तो पहले से करवा रहे है लेकिन कोरोना के कारण उनकी मनोदशा अधिक बिगड़ी है।

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