कोरोना : सांसों की जंग में शामिल हुआ कोलकाता !

अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट : कागजी रह गयी घोषणनाएं
क्षमता की आधी ऑक्सीजन दूसरे राज्यों में जा रही है
कोरोना के पहले वेब ने ही चेता दिया था, सतर्कता के बावजूद उदासीन रही सरकार
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : दौर कोरोना के पहली लहर का था, ज्यादा दिन नहीं हुए उंगलियों में गिनेंगे तो चंद महीने पीछे ही जाना होगा। कोलकाता समेत राज्य के अलग-अलग राज्यों में जिस तरह कोरोना का तांडव मचा था एक्सपर्ट ने साफ बता दिया था कि आने वाले समय में ऑक्सीजन एक बड़ी समस्या खड़ी कर सकता है। सलाह को राज्य सरकार ने माना भी था उस पर कागजी काम भी चालू किया गया था जिसके तहत समस्त मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के अलावा बाकी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने की योजना बनायी गयी थी। यह योजना जिला स्तर पर क्रियान्वित होनी थी लेकिन कोरोना के कम होते प्रभाव को देखते हुए शायद योजना फाइलों में कहीं दब कर रह गयी। आज कोरोना का दूसरा वेब है, बंगाल में तो ट्रिपल म्यूटेशन वेरिएंट ने दस्तक दे दी है जो ज्यादा खतरनाक और जानलेवा साबित हुई है। संकट की इस घड़ी में बाकी राज्यों की ही तरह कोलकाता भी सांसों की जंग में शामिल हो गया है। जी हां जिस तरह ऑक्सीजन की किल्लत देखी जा रही है उससे वह समय दूर नही जब सिटी ऑफ जॉय में भी हवा के लिए हाहाकार मचेगा।
मिलते है 450 एमटी दूसरे राज्य को देने है 200 एमटी
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि प्रतिदिन के हिसाब से मेडिकल क्षेत्र के लिए करीब 450 मेट्रीक टन ऑक्सीजन की सप्लाई होती है। उसमें से राज्य को हर दिन करीब 380 मेट्रीक टन ऑक्सीन की डिमांड है। अब केंद्र ने आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत 200 मेट्रीक टन ऑक्सीजन दूसरे राज्यों में भेजने का निर्देश जारी कर दिया है जो बंगाल के लिए दिक्कत पैदा कर सकता है।
नियम में बंध गयी बंगाल सरकार
नवान्न के एक अधिकारी ने बताया कि मेडिकल ऑक्सीजन को लेकर कोई खास नियम नहीं है। या कह सकते है कि कभी जरूरत ही नहीं पड़ी। अचानक इस आपदा के कारण ऑक्सीजन को लेकर परेशानी भी आयी है जो बड़ी चुनौती है। अब केंद्र ने आपदा प्रबंधन एक्ट का इस्तेमाल करके निर्देश दिया है तो उसमें चाहकर भी राज्य सरकार हाथ खड़े नहीं कर सकती है। बल्कि प्लांट से दूसरे राज्य में जा रहे ऑक्सीजन को पहुंचाने की जिम्मेदारी भी हम पर ही दी गयी है।
बेलियाघाटा आईडी और एमआर बांगुर में हैं व्यवस्था
कोलकाता के इन दोनों अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट की पूरी व्यवस्था है। एमआर बांगुर के सुपर डॉ. शिशिर नस्कर ने सन्मार्ग को बताया कि यहां शुरू से ही कोविड 19 का इलाज होता आ रहा है, इसलिए कोशिश की जा रही है कि बगैर किसी रुकावट के मरीजों तक ऑक्सीजन पहुंचा दिया जाए, इसलिए यहां पूरी व्यवस्था की गई है।

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