केंद्र ने कहा, ‘3 आईपीएस अधिकारियों को तुरंत छोड़े राज्य सरकार’

तीनों आईपीएस अधिकारियों की केंद्र ने की पोस्टिंग
सीएम ने जताया कड़ा विरोध
केंद्र और राज्य के बीच बढ़ी तकरार
कोलकाता : केंद्र सरकार ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल सरकार से 3 आईपीएस अधिकारियों को तुरंत छोड़ने के लिए कहा ताकि वे सेंट्रल डेपुटेशन के लिए ज्वाइन कर सकें। अधिकारियों ने बताया कि उक्त तीनों आईपीएस अधिकारियों को कार्य दे दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से इस संबंध में पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को एक पत्र दिया गया है जिसमें कहा गया है कि आईपीएस कैडर के नियमों के अनुसार, किसी तरह के विवाद में राज्य सरकार से अधिक महत्वपूर्ण केंद्र का निर्णय होगा। वहीं राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र के इस निर्णय का कड़ा विरोध जताते हुए ट्वीट कर कहा है कि वह तीनों आईपीएस अधिकारियों को केंद्र में नहीं भेजेंगी। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार के बीच तकरार लगातार बढ़ती नजर आ रही है।
तीनों आईपीएस अधिकारियों की हुई पोस्टिंग
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया कि जे. पी. नड्डा के कॉनवाॅय पर हुए हमले के दिन ड्यूटी पर तैनात तीनों आईपीएस अधिकारियों की पोस्टिंग कर दी गयी है। इस दिन भोलानाथ पाण्डेय की पुलिस रिसर्च ब्यूरो एण्ड इनवेस्टमेंट में एसपी, प्रवीण त्रिपाठी की सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में डीआईजी और राजीव मिश्रा की इंडो-​तिबतन बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) के आईजी के रूप में पोस्टिंग की गयी है।
ड्यूटी में लापरवाही बरतने का है आरोप
उक्त तीनों पुलिस अधिकारियों पर जे.पी. नड्डा के कॉनवॉय पर हमले के दिन ड्यूटी में लापरवाही बरतने का आरोप है। गत 10 दिसम्बर को डायमण्ड हार्बर में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा के कॉनवॉय पर हमला हुआ था। इसके बाद केंद्र सरकार ने तीनों आईपीएस अधिकारियों को सेंट्रल डेपुटेशन पर भेजने का निर्णय लिया था, लेकिन राज्य सरकार की ओर से केंद्र को पत्र लिखकर कहा गया था कि आईपीएस अधिकारियों को सेंट्रल डेपुटेशन पर जाने नहीं दिया जाएगा। अमूमन आईपीएस अधिकारियों को सेंट्रल डेपुटेशन पर लेने से पहले राज्य सरकार की सहमति लेनी होती है, लेकिन इस मामले में केंद्र की ओर से राज्य सरकार को दरकिनार करते हुए एकतरफा निर्णय लिया गया।
क्या कहते हैं नियम
इंडियन पुलिस सर्विस (कैडर) रूल्स 1954 के एक क्लॉज में कहा गया है कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच किसी तरह के ​विवाद पर संबंधित राज्य सरकारों को केंद्र का निर्णय मानना हाेगा।
डीजीपी व मुख्य सचिव भी नहीं गये थे बैठक में
गृह मंत्रालय ने राज्य की कानून – व्यवस्था के बारे में जानकारी लेने के लिए पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और डीजीपी को गत 14 दिसम्बर को बैठक में बुलाया था, लेकिन उस बैठक में भी डीजीपी व मुख्य सचिव नहीं गये थे। राज्यपाल जगदीप धनखड़ द्वारा केंद्र सरकार को राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर रिपोर्ट दिये जाने के बाद ही गृह मंत्रालय ने डीजीपी व मुख्य सचिव को बुलाया था। वहीं जे. पी. नड्डा के कॉनवॉय पर हमले की घटना को मुख्यमंत्री ने भाजपा का ड्रामा बताया था।
राज्य सरकार के पास अब अधिक विकल्प नहीं
राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में राज्य प्रशासन के पास अधिक कुछ करने को नहीं है। अगर कोई पुलिस अधिकारी सेंट्रल डेपुटेशन में जाना चाहे तो ऐसे में राज्य सरकार को ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ देना होगा, हालांकि यह एक औपचारिकता है ताकि संबंधित अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड में कोई ‘दाग’ ना आये। केंद्र चाहे तो उस सर्टिफिकेट की भी कोई आवश्यकता नहीं होगी। राज्य सरकार सर्टिफिकेट दे या नहीं, गृह मंत्रालय चाहे तो किसी अधिकारी को दिल्ली बुला सकता है।

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