सेंट्रल फोर्स : भाजपा की अपील खारिज, गई डिविजन बेंच में

चीफ जस्टिस व जस्टिस भारद्वाज के खंड पीठ में सुनवायी आज
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कोलकाता नगर निगम के चुनावों में सेंट्रल फोर्स की तैनाती नहीं होगी। इस बाबत दायर भाजपा की अपील को हाई कोर्ट के जस्टिस राजाशेखर मंथा ने वृहस्पतिवार को सुनवायी के बाद खारिज कर दिया। सिंगल बेंच के इस फैसले के खिलाफ इसी दिन चीफ जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस राजर्षि भारद्वाज के डिविजन बेंच में अपील दायर की गई। शुक्रवार को इस पर सुनवायी होगी।
सेंट्रल फोर्स की तैनाती के पक्ष में भाजपा की तरफ से बहस करते हुए एडवोकेट एस के कपूर ने कहा कि उम्मीदवारों की घोषणा के बाद से ही तृणमूल समर्थकों ने हिंसा की शुरुआत कर दी। भाजपा के चार उम्मीदवारों ने एफआईआर दर्ज करायी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके खिलाफ शिकायत की गई पर इसका कोई असर नहीं हुआ। राज्य चुनाव आयोग की तरफ से बहस करते हुए एडवोकेट रत्नानोक बनर्जी ने कहा कि इन चार उम्मीदवारों की तरफ से आयोग में कोई शिकायत दर्ज नहीं करायी गई थी। शांतिपूर्ण तरीके से निष्पक्ष चुनाव कराये जाने के लिए पुलिस फोर्स की तैनाती की योजना बना ली गई है। राज्य सरकार से संविधान के मुताबिक सलाह मशविरा के बाद सुरक्षा की व्यवस्था की गई है। राज्य सरकार की तरफ से बहस करते हुए एडवोकेट जनरल एस एन मुखर्जी ने कहा कि हिंसा के बाबत कोई तथ्य नहीं पेश किया गया है। जिन चार उम्मीदवारों ने एफआईआर दर्ज करायी थी उन्हें सुरक्षा उपलब्ध करा दी गई है। यह साबित नहीं कर पाए हैं कि चुनाव आयोग द्वारा किए गए सुरक्षा के ‌इंतजाम मुकम्मल नहीं है और शांतिपूर्ण तरीके से निष्पक्ष चुनाव नहीं करा पाएगा। जस्टिस मंथा ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि चुनाव आयोग द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों के मुताबिक डीजी. आईजी और एडीजी, कानून व्यवस्था के साथ सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा की गई है। इस बाबत मुख्य सचिव से भी बात हुई है। उन्होंने कहा कि चार शिकायतों में से तीन के मजमून और भाषा एक ही है। जस्टिस मंथा ने कहा कि सीपी एक जिम्मेदार अधिकारी हैं। राज्य चुनाव आयोग ने सेंट्रल फोर्स तैनात किए जाने की मांग नहीं की है इसलिए कोर्ट इस आशय का आदेश देने से इनकार करता है। चीफ जस्टिस के डिविजन बेंच में दायर अपील के बारे एडवोकेट धीरज त्रिवेदी ने कहा कि 2013 के चुनाव में सेंट्रल फोर्स तैनात की गई थी। हाल के विधानसभा चुनाव के बाद सरकार दावा करती रही कि कोई हिंसा नहीं हुई है और एनएचआरसी की रिपोर्ट में हिंसा की पांच हजार घटनाओं का हवाला दिया गया है। इसलिए सेंट्रल फोर्स की मौजूदगी में ही निष्पक्ष चुनाव कराया जा सकता है। अपील में कहा गया है कि सेंट्रल फोर्स की तैनाती से राज्य सरकार को खौफ क्यों है।

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