बंगाल के चटकलों के लिए संकटमोचक है केंद्र का फैसला

कोलकाता : कोरोना के कहर से हर क्षेत्र किसी न किसी तरीके से प्रभावित हुए हैं। बंगाल का चटकल उद्योग भी इससे अछूता नहीं है। यहां भी उद्योग से जुड़ा हर कोई कोरोना के जबरदस्त धावे से खुद को बचा नहीं पाया है। इन सभी​ के बीच गनीमत यह है कि केंद्र सरकार की ओर से बंगाल के चटकलों को हमेशा से ही प्राथमिकता दी गयी है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने निर्णय लिया है कि अनाजों की पैकेजिंग के लिए शत-प्रतिशत और चीनी की पैकजिंग के लिए 20 प्रतिशत जूट बैग अनिवार्य होगा। केंद्र के इस निर्णय का इज्मा ने स्वागत किया है। इस बारे में इज्मा के चेयरमैन राघवेंद्र गुप्ता ने सन्मार्ग को बताया कि यह केंद्र का चटकल उद्योग के प्रति सराहनीय और सहयोगपूर्ण कदम है। हम सभी इसका स्वागत करते है।

बोरों के लिए बंगाल के चटकल सबसे आगे

पूरे देश मे हर जगह अनाजों के भण्डारन के लिए बंगाल में बनी जूट की बोरियों की मांग सबसे अधिक है। कोविड 19 के समय जब रबी का सीजन था जब लॉकडाउन के कारण स्थिति यह थी कि किसान 15 अप्रैल से मंडियों में अनाज बेचने की तैयारी कर रहे थे जबकि अनाजों के भण्डारन के लिए किसी भी राज्य के पास पर्याप्त मात्रा में जूट बैग ही नहीं थे। कुछ राज्यों ने तो बंगाल के मुख्य सचिव से इस बारे में सम्पर्क भी किया था।

केंद्र द्वारा दिया जाता है जूट बैग्स का आर्डर

बंगाल को जूट बैग का आर्डर केंद्र सरकार देती है। केंद्रीय खाद्य आपूर्ति विभाग इन जूट बैगों को हर राज्यों को बेचती है। इसमें बंगाल ही इनका सबसे बड़ा जूट बाजार हैं क्योंकि यहां कुल 59 जूट मिले हैं जिनमें से 52 चटकल चालू हैं। लॉकडाउन के कारण चटकलों में 10 प्रतिशत काम पिछड़ गया है।

इन राज्यों में जाता है बंगाल का बड़ा आर्डर

पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और हरियाणा। इन राज्यों में रबी और खरीफ के सीजन में मिलाकर 5-8 लाख बेल्स का आर्डर मिलता है।

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