पर फोटोग्राफ तो सीबीआई की दलील की तस्दीक नहीं करते

नारदा मामले में सीबीआई के भीड़तंत्र पर बचाव पक्ष का सवाल
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : नारदा स्टिंग ऑपरेशन मामले में सीबीआई की दलील रही है कि भीड़तंत्र के कारण न्यायिक प्रक्रिया सिर्फ प्रभावित ही नहीं विकृत भी हुई। पर बचाव पक्ष का सवाल था कि जो तस्वीर कोर्ट में पेश की गई है वह ‍उनकी दलील की तस्दीक नहीं करती है। मंगलवार को सुनवायी में यह सवाल उठा। एक्टिंग चीफ जस्टिस राजेश बिंदल, जस्टिस आईपी मुखर्जी, जस्टिस हरीश टंडन, जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस अरिजीत बनर्जी की लार्जर बेंच इसकी सुनवायी कर रही है।
लार्जर बेंच मंत्री सुब्रत मुखर्जी एवं फिरहाद हकीम और पूर्व मंत्री मदन मित्रा एवं पूर्व मेयर शोभन चटर्जी की जमानत याचिका पर सुनवायी कर रही है। एडवोकेट अमृता पांडे ने इस मामले की सुनवायी के बाबत जानकारी देते हुए बताया कि बचाव पक्ष की तरफ से बहस कर रहे एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कुछ दिलचस्प सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सीबीआई सिर्फ भीड़ की बात करती है और सीआरपीसी की हर धारा में इसका हवाला देती है। कभी 407 कहते हैं, कभी 226 तो कभी 482 की बात करने लगते हैं। एडवोकेट सिंघवी ने कहा कि जो तस्वीरे पेश की गई है वे न तो वेरिफायड हैं और न ही प्रमाणित हैं। इनमें कहीं से यह साबित नहीं हो रहा है कि मामले की सुनवायी के दौरान कोर्ट में हजारों लोग मौजूद थे। सीबीआई या सीआरपीएफ की तरफ से कोई एफआईआर भी नहीं दर्ज करायी गई है। सुनवायी के दिन कानून मंत्री तीसरी मंजिल पर नहीं गए थे जहां स्पेशल जज की अदालत है। सीसीटीवी कैमरे इसका सुबूत हैं। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन को यह नहीं कह सकते कि वे न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे। सीबीआई ने तो स्पेशल कोर्ट में इस सवाल को नहीं उठाया था। यह एक बाद की सोची समझी रणनीति है। जस्टिस आईपी मुखर्जी ने सवाल किया कि न्याय के लिए ही सही अगर इस मामले को ज्यादा सुरक्षित स्थान पर ट्रांसफर कर दें जहां नेताओं का ज्यादा प्रभाव न हो तो क्या एतराज है। जवाब में एडवोकेट सिंघवी ने कहा कि उस दिन सारे स्पेशल जजों के कोर्ट में न्यायिक प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही थी बस यहीं विकृत हो गई थी। एडवोकेट सिंघवी ने कहा कि कभी सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को पिंजरे का तोता कहा था, कैद करना गलत है, पर इतनी छूट देना तो और गलत है कि वह कहीं भी उड़ कर पहुंच जाए और अपना कहर बरपाने लगे। अब इसकी अगली सुनवायी बुधवार को होगी।

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