कई समस्याओं से घिरे हैं मंगलाहाट के व्यवसायी…

व्यापार पड़ रहा है ठप, हाट को मंगलवार को ही खोलने की मांग की गयी
राज्य सरकार जल्द चलाये लोकल ट्रेनें
हावड़ा : हावड़ा में स्थित एशिया का सबसे वृहत्तम मंगलाहाट पिछले कुछ समय से कई समस्याओं से गुजर रहा है। साल 2020 में जहाँ लॉकडाउन के बाद हाट को खोलने के लिए व्यवसाइयों को बहुत ही कड़ी मशक्कत करनी पड़ी, वहीं साल 2021 में हाट खोला गया लेकिन उसमें भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल प्रशासन की ओर से हाट को पहले मंगलवार को खोलने की अनुमति नहीं दी गई थी और उसे शनिवार और रविवार किया गया। बाद में धीरे-धीरे इसके बाद हाट की टाइमिंग को फिर से चेंज करते हुए सोमवार और मंगलवार का समय रख दिया गया। ऐसे में थोड़े समय के लिए वहाँ के व्यवसायियों को राहत तो मिली लेकिन यह राहत फिर से एक आफत में बदल गई। मंगलाहाट में एक बार में करीब 20 हजार व्यवसायी काम करते हैं और यहाँ पर मौजूद इमारतों में 3-4 हजार व्यवसायी अपना व्यापार चलाते हैं।
प्रशासन का कहर एक बार फिर बरपा!
प्रशासन का कहर एक बार फिर उन पर बरपा। दरअसल यह जानकारी शायद प्रशासन को भी नहीं होगी कि यह कहर कैसे बरपा? क्योंकि हाल ही में प्रशासन की ओर से निर्णय लिया गया कि हर सप्ताह के एक दिन प्रत्येक थानों के बाजार को बंद किया जाएगा। ऐसे में हावड़ा थाना का इलाका मंगलवार को पड़ गया और मंगलवार को हावड़ा थाना अंतर्गत आने वाले सभी बाजारों को बंद करने का निर्णय लिया गया। ऐसे में मंगलाहाट भी इसी थाना इलाके के अंतर्गत आता है। ऐसे में व्यवसायियों के लिए यह एक दिक्कत की बात है कि वे सही से अपना सामान नहीं बेच पा रहे हैं।
दोनों सरकारों से माँगी मदद
मंगलाहाट में कार्यरत एक व्यवसायी रॉबिन साहा का कहना है कि वे यहाँ पर कई सालों से हाट से जुड़े रहे हैं, पर सरकार द्वारा किए गये लॉकडाउन में उन्हें काफी नुकसान का सामना करना पड़ा। यहां पर केवल कपड़ा व्यवसायी नहीं बल्कि कपड़े में बटन लगाने वाले, कपड़ा सिलाई करने वाले और कई ठेका मजदूर इस व्यवसाय से जुड़े हैं। ऐसे में काम नहीं होने से और यहाँ पर ग्राहक नहीं आने से सब काम ठप पड़ा है। इसलिए उन्होंने अनुरोध किया है कि राज्य ही नहीं केंद्र सरकार भी उन पर ध्यान दे, अगर यहाँ हाट ठीक तरीके से चलने लगेगा तो सरकार को भी आर्थिक लाभ पहुँचाने में अपनी भूमिका को हम अदा कर पाएंगे। इसके अलावा राहुल मल्लिक नामक एक और व्यवसायी का कहना है कि हाट में कोई ग्राहक नहीं आता है। कई घंटों तक ऐसे ही बैठे रहना पड़ता है। वहीं रविंदर साव का कहना है कि अब तो रोजी रोटी पर सवाल खड़ा हो गया है, क्योंकि जब सामानों की बिक्री नहीं होगी तो आमदनी नहीं होगी, तब तो खाने के लाले पड़ेंगे ही।
ट्रेनों के नहीं चलने से बहुत नुकसान
कालीपद मंडल नामक एक व्यवसायी का कहना है कि मंगलाहाट का सबसे बड़ा नुकसान ट्रेनों के नहीं चलने से हो रहा है। कई दिनों से लोकल ट्रेनें बंद पड़ी हैं। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा सामानों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में काफी दिक्कतें हो रही हैं। दूसरी ओर उनके ग्राहक भी उन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, क्योंकि वे ट्रेन के माध्यम से हाट पहुँचते हैं और ट्रेन के माध्यम से ही सामानों को अपने गंतव्य पर ले जाते हैं।
मंगलाहाट को मंगलवार ही किया जाए
मंगलाहाट के व्यवसायी समिति की ओर से कनाई पोद्दार ने कहा कि मंगलाहाट का नाम मंगलवार के दिन होने वाले इस हाट के कारण ही पड़ा है। ऐसे में अगर मंगलवार को ही हाट नहीं होगा तो सबसे ज्यादा नुकसान व्यवसायियों को झेलना पड़ रहा है। ऐसे में वे अब 15 जुलाई का इंतजार कर रहे हैं कि आखिरकार सरकार की ओर से उनके पक्ष में कुछ तो फैसला आयेगा।

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