केन्द्रीय एजेंसियों के हमले से हिचखोले खा रहे हैं व्यवसायी

कोलकाता : केन्द्रीय एजेंसियों के हमले से हिचखोले खा रहे हैं कोलकाता के व्यवसायी। सूत्र बताते हैं कि इस बार भाजपा की बेहद आक्रामक नीति है। तृणमूल से भाजपा में शामिल हुए नेता विभीषण का काम कर रहे हैं। उन्हें तृणमूल की रणनीति चूंकि पहले से पता है, इसलिए वे तृणमूल द्वारा उठाये जाने वाले कदमों का तोड़ पहले ही अपने बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं को बता दे रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि केन्द्र में सत्ता में बैठे इन नेताओं द्वारा जब इन एजेंसियों के दिल्ली हेडक्वार्टर्स में संदेश पहुंचता है तो वहां से यहां पर कार्रवाई करने को कहा जाता है। पहले जहां एडवरटाइजिंग एजेंसी थोड़ी भी जगह भाजपा के नेताओं के पोस्टरों के लिए नहीं देना चाहती थी, वहां अब तृणमूल नेताओं से भी बड़े-बड़े पोस्टर व बैनर लगने लगे हैं। नाम न बताने की शर्त पर एक एडवरटाइजर ने बताया कि हमें भाजपा को भी बैनर व होर्डिंग्स लगाने के लिए जगह देने के लिए कहा गया है। वहीं केन्द्रीय एजेंसियां भी हम पर नजर गड़ाई हुई हैं। ऐसे में समय की मांग को देखते हुए हमें वह सब करना पड़ रहा है। हमारे लिए दोनों पार्टियां समान हैं क्योंकि हम व्यवसायी हैं। तृणमूल की ओर से पहले से बुकिंग कर ली गयी थी फिर भी भाजपा के लिए हमें स्पेस देना पड़ा है।
बीजेपी के होर्डिंग्स टीएमसी से भी बड़े
राज्य की सत्ता में काबिज तृणमूल की एक नहीं चलने दी जा रही है। आरोप है कि चारों ओर से प्रेशर देकर भाजपा किसी भी तरह यह चुनाव जीतना चाहती है। यही कारण है कि जहां भी तृणमूल के होर्डिंग्स लगे हैं, ठीक वहां भाजपा के भी होर्डिंग्स लगाये जा रहे हैं। भाजपा के एक नेता का आरोप है कि टीएमसी के पास बड़े और सभी साइटों का एकाधिकार है। कोलकाता और पूरे बंगाल के कई हिस्सों में सिर्फ उसके ही होर्डिंग्स के लिए जगह रहते हैं। उनका कहना है कि टीएमसी नेता विज्ञापन एजेंसियों पर दबाव डाल रहे हैं कि वे भाजपा के प्रस्तावों को स्वीकार न करें और उन्हें पोस्टर और होर्डिंग्स के लिए स्थान न दें। आप कोलकाता या ट्रेन से कोलकाता आते हैं तो केवल ममता के होर्डिंग्स देखते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रिंटिंग का कार्टेल और विज्ञापन एजेंसियां ​​पूरी तरह से टीएमसी के नियंत्रण में हैं। वे अगर नरेंद्र मोदी या अमित शाह के लिए होर्डिंग्स की अनुमति देती हैं तो उनके लाइसेंस रद्द कर दिये जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक कोलकाता में होर्डिंग्स के लिए लगभग 10,000 स्थान हैं, जिनमें से 2,000 के आसपास प्रीमियम स्पॉट हैं। इनमें पार्क सर्कस, पार्क स्ट्रीट, साल्टलेक, अलीपुर, दमदम सहित अन्य स्थान शामिल हैं। ऐसे में इन्हें लेकर ही समस्याएं देखी जा रही थीं। तृणमूल की ओर से इसे निराधार बताया गया है। इनका कहना है कि केन्द्रीय एजेंसियों को एक मोहरा बनाकर बंगाल की सत्ता को भाजपा किसी भी तरह हथियाना चाहती है।
आयकर की टीम ने एक महीने पहले ही मारा था एक एडवरटाइजिंग एजेंसी के यहां छापा
सूत्र बताते हैं कि आयकर की टीम की छापामारी चुनाव से पहले एक एडवरटाइजिंग एजेंसी के मालिक के यहां मारी गयी थी। उक्त एजेंसी सरकारी विज्ञापनों का काम करती थी। यह खबर काफी थी, अन्य व्यवसायियों के लिए। सूत्र बताते हैं कि व्यवसायियों में डर का माहौल है कि अगर वे बात नहीं मानेंगे तो हो सकता है कि उनके पीछे कोई केन्द्रीय एजेंसी लग जाए। उल्लेखनीय है कि फिलहाल चुनाव के दौरान आयकर विभाग के अलावा, सीबीआई, ईडी व डीआरआई सहित सभी केन्द्रीय एजेंसियां फुलफाॅर्म में कार्य कर रही हैं।

शेयर करें

मुख्य समाचार

फेसबुक लाइव पर फफक पड़े महानगर के डॉक्टर, बोले- ‘आंखों के सामने…

कोलकाताः पूरा देश कोरोना वायरस की चपेट में है। हर तरफ से मौतों, इलाज न मिलने समेत कई ऐसी कहानियां और तस्वीरें सामने आ रही आगे पढ़ें »

सुबह-सुबह शराब की दुकान के बाहर लगी लंबी लाइन, पुलिस ने किया लाठीचार्ज

कोलकाताः पश्चिम बंगाल में कोरोना संक्रमण के बढ़ते हुए मामले को देखते हुए रविवार सुबह से 15 दिवसीय लॉकडाउन सुबह से शुरू हुआ। पश्चिम बंगाल आगे पढ़ें »

ऊपर