आज से सड़कों पर निजी बसों के उतरने को लेकर संशय

50% या​त्रियों के साथ बसें चलाने में 300% तक नुकसान
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य सरकार द्वारा घोषणा की गयी है कि आज यानी 1 जुलाई से 50% सीटिंग क्षमता के साथ राज्य भर में बसें चलायी जा सकती हैं। हालांकि पेट्रोल व डीजल की बढ़ी कीमतों और बसों का किराया अब तक नहीं बढ़ाये जाने के कारण आज से सड़कों पर निजी बसों के उतरने को लेकर संशय है। बस संगठनों का स्पष्ट तौर पर कहना है कि जब तक किराया बढ़ाने के संबंध में राज्य सरकार संगठनों के साथ कोई चर्चा नहीं करती या कोई उचित गाइडलाइन इसे लेकर नहीं जारी किया जाता तो ऐसे समय में बसों काे सड़कों पर उतारना मुमकिन नहीं है।
केवल कमेटी बन रही, किराया नहीं बढ़ रहा
ऑल बंगाल बस मिनी बस समन्वय कमेटी के महासचिव राहुल चटर्जी ने कहा, ‘जंगल महल से लेकर दूरगामी बसें भी हमारी चलती हैं। कोई बस मालिक अपनी मर्जी से बस उतारना चाहे तो अलग बात है। ना इस बार आर्थिक स्थिति है और ना मनोबल है कि हम बसें उतारने की अपील करें। पिछले 1 वर्ष में कोरोना और लॉकडाउन के बीच राज्य सरकार द्वारा बसों की स्थिति ठीक करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। वर्ष 2020 में किराया बढ़ाने को लेकर कमेटी बनी थी, इस बार भी कमेटी बनी है, लेकिन केवल कमेटी ही बन रही है। इससे आगे कुछ नहीं हो रहा।’ उन्होंने कहा, ‘50% यात्री लेकर चलाना पड़े तो हमें 300% का नुकसान होगा। सामान्य तौर पर भी बसें चलें तो हमें 100% नुकसान झेलना होगा। अगर किराया 3 गुना बढ़ाया जाए ताे ही हमें राहत मिलने की संभावना दिख रही है।’
मैं खुद आज से नहीं चला पाऊंगा बस
पश्चिम बंगाल बस व मिनी बस ऑनर्स एसोसिएशन के संयुक्त सचिव प्रदीप नारायण बोस ने कहा, ‘संगठन का मुखिया होकर भी मेरे लिए आज से बसें चलाना संभव नहीं है। फिर मैं कैसे बस मालिकों से अपील करूं ​कि वे बसें उतारें। पिछली बार इस समय डीजल का दाम 62 रु. के करीब था जबकि इस बार 92 से 95 रु. दाम है। बस मालिक इस स्थिति में नहीं है कि किराया बढ़ाये बगैर 50% यात्रियों के साथ बसें चलायें। आज ऐसे भी सरकारी छुट्टी है, लेकिन इस बीच राज्य सरकार ने किराया बढ़ाने को लेकर कुछ नहीं किया तो बसें उतारना संभव नहीं होगा।’
कोविड नियम मानकर बसें चलाना है तो किराया बढ़ाये सरकार
ज्वाइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट के महासचिव तपन बनर्जी का कहना है कि एक तरफ राज्य सरकार कोविड नियम मानकर 50% यात्रियों के साथ बसें चलाने की बात कर रही है और दूसरी तरफ किराया भी नहीं बढ़ाया जा रहा है। ऐसी स्थिति में हमारे लिए बसें उतारना या बसें उतारने की अपील करना कहीं से संभव नहीं होगा। पिछली बार किराया बढ़ाने को लेकर कमेटी बनी थी और इस साल भी केवल कमेटी ही बनी है। इधर, मेट्रो और लोकल ट्रेनें भी बंद हैं जिस कारण स्वाभाविक तौर पर बसों में या​त्रियों की संख्या कम रहेगी। इन सबके बीच पुराने किराये पर बसें चलाना अब संभव नहीं होगा।

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