शाम होते ही बसों में भीड़, यात्री हो रहे हलकान

बसों की संख्या कम होने से बढ़ी परेशानी
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाताः राज्य में कोरोना वायरस महामारी के सेकेंड वेव का असर अब भी जारी है। हालांकि कोविड के कम होते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने निजी बसों को भी चलाने की अनुमति दे दी थी। बसें सड़कों पर उतर रही हैं। देखा जा रहा है कि शाम होते ही बसों की संख्या काफी कम हो जा रही है। इस कारण यात्रियों को व्यापक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बसें शाम को आवश्यकता के मुकाबले काफी कम हैं। ऐसे में यात्रियों को काफी दिक्कत हो रही है।
ज्वाइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट के महासचिव तपन बनर्जी ने कहा कि वास्तव में बसें फिलहाल कैसे चल रही हैं, यह समझ से परे है। दरअसल लगातार डीजल की कीमतों में वृद्धि जारी है। इस कारण बस मालिकों को पर्याप्त आय नहीं हो पा रही है। शाम को बसें कम होने का कारण यह भी है कि पर्याप्त यात्री बसों में नहीं मिल रहे हैं। इसके अलावा रात को 9 बजे तक ही बसों को अनुमति है।
बस किराया को लेकर रेग्युलेटरी कमेटी स्पष्ट करे रणनीति
निजी बस संगठनों की ओर से बस किराये में वृद्धि को लेकर लगातार मांग की जा रही है। हालांकि अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। सिटी सबर्बन बस सर्विस के महासचिव टीटू साहा ने कहा कि हमारी मांग है कि बस फेयर रेग्युलेशन कमेटी बस किराये को लेकर स्थिति स्पष्ट करे। इसके अलावा पुलिस की ओर से बसों को बेवजह परेशान करना बंद किया जाए।
महानगर में परिवहन परिसेवा
परिवहन यात्री (औसतन, रोजाना)
कोलकाता मेट्रो- 6.5 से 7 लाख
निजी बसें- 35 से 40 लाख
ऑटो- करीब 20 लाख
सरकारी बसें- करीब 1 से डेढ़ लाख
इस पर भी नजर
डब्ल्यूबीटीसी बसें- करीब 1400 से अधिक
निजी बसें- 3000 से अधिक
ऑटो – 35 हजार से अधिक
ऐप कैब- 25 हजार करीब
बाइक टैक्सी- 30 हजार करीब
फेरी परिसेवा (डब्ल्यूबीटीसी अंतर्गत)
22 रूट व 25 से अधिक वेसल

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