ब्रेकिंग : हाई कोर्ट ने स्कूलों में नियुक्ति घोटाले की जांच सौंपी सीबीआई को

कोलकाता : सरकारी और सरकार द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त स्कूलों में ग्रुप डी पदों पर नियुक्ति में घोटाले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। हाई कोर्ट के जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने सोमवार को यह आदेश दिया। हालांकि राज्य सरकार, सेंट्रल स्कूल सर्विस कमिशन और एडवोकेट जनरल ने सीबीआई को जांच सौंपे जाने का पुरजोर विरोध किया। जस्टिस गंगोपाध्याय ने उनकी सारी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि सीबीआई जांच के सिवा और कोई विकल्प नहीं है।
जस्टिस गंगोपाध्याय ने आदेश देने से पहले एडिशनल सालिसिटर जनरल वाई जे दस्तूर से कोर्ट में आने का अनुरोध किया। इसके बाद दिए अपने आदेश में उन्होंने कहा है कि सीबीआई के ज्वायंट डायरेक्टर तीन अफसरों की एक कमेटी बनाएंगे, जिनकी पदमर्यादा डीआईजी से कम नहीं होगी। ज्वायंट डायरेक्टर जांच की मॉनिटरिंग करेंगे और इसकी प्राथमिक रिपोर्ट 21 दिसंबर को कोर्ट में जमा करनी पड़ेगी। इसके बाद इस मामले की तफतीश की दशा और दिशा तय की जाएगी। इस प्रकरण का सबसे दिलचस्प पहलू तो यह है कि जहां राज्य सरकार और सेंट्रल स्कूल सर्विस कमिशन सीबीआई जांच का तीखा विरोध कर रहे थे वहीं बोर्ड ऑफ सेकंडरी एडुकेशन की तरफ से पैरवी कर रही एडवोकेट ने सीबीआई जांच पर अपनी सहमति जता दी। इस मामले में पिटिशनरों की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट विकास रंजन भट्टाचार्या और एडवोकेट सुदीप्त दास गुप्ता ने बताया कि ग्रुप डी पदों पर नियुक्ति के लिए 2016 में विज्ञप्ति निकाली गई थी और 2019 की मई में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो गई थी। इसके बाद संस्तुति पत्र के आधार पर 2020 में नियुक्तियां की गई थी। इन्हें हाई कोर्ट में एक रिट दायर कर के चुनौती दी गई थी। जस्टिस गंगोपाध्याय ने सेंट्रल स्कूल सर्विस कमिशन को आदेश दिया था कि वह एफिडेविट दाखिल करके बताए कि ये संस्तुति पत्र किस ने जारी किया था। कमिशन की तरफ से दायर एफिडेविट में कहा गया है कि उनके पांच जोनल कार्यालयों मेें से किसी ने भी संस्तुति पत्र नहीं जारी ‌किया है। कोर्ट ने बोर्ड को भी इस बाबत एफिडेविट दाखिल करने का आदेश दिया था। बोर्ड की तरफ से दायर एफिडेविट में कहा गया है कि कमिशन ने संस्तुति पत्र जारी किया था और इसी आधार पर नियुक्तियां दी गई थी। बोर्ड के पास इसका रिकार्ड मौजूद है। ये संस्तुति पत्र चेयर पर्सन के दस्तखत से जारी किए गए थे। इसके अलावा इस बाबत प्रमुख सचिव और बोर्ड के अधिकारी से हुई बातचीत का ब्योरा भी मौजूद है। इसके बाद जस्टिस गंगोपाध्याय ने सवाल किया कि तो फिर वह रहस्यमय व्यक्ति कौन है जिसके संस्तुति पत्र पर हजारों नियुक्तियां की गई हैं। उन्होंने यह सवाल भी किया कि क्या इसमें पैसे का भी खेल है। जस्टिस गंगोपाध्याय ने एडवोकेट जनरल एस एन मुखर्जी और कमिशन की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट किशोर दत्त की दलील को खारिज करते हुए कहा कि हमें शब्दों की बाढ़ में बहाने की कोशिश नहीं करें। कमिशन, बोर्ड और शिक्षा विभाग राज्य सरकार के अधीन है। पुलिस भी राज्य सरकार के अधीन है। तो फिर पारदर्शिता के साथ इसकी निष्पक्ष जांच कराने और आम लोगों के विश्वास के बहाल करने के इरादे से सीबीआई जांच ही एकमात्र विकल्प है। इस पर स्टे लगाने की अपील को उन्होंने खारिज कर दिया।

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