राज्य में रक्त की भारी कमी, ‘खून चूसने वाले’ हुए सक्रिय

प्रति यूनिट ब्लड की कीमत
ब्लड सरकारी दर निजी ब्लड बैंक की दर
होल ब्लड 1050 1450
रेड सेल 1050 1450
प्लाज्मा 300 400
प्लेटलेट 300 400
कायो 200 250
राज्य में 84 सरकारी ब्लड बैंक, 35 निजी और 15 भारत सरकार के ब्लड बैंक
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : क्या आपने कभी खून चूसने वालों का नाम सुना है ? राज्य में रक्त के भारी संकट का फायदा उठाते हुए ये खून चूसने वाले गिरोह सक्रिय हो गये हैं। राज्य के वि​भिन्न ब्लड बैंकों के आस-पास ये खून चूसने वाले लोग आपको घूमते हुए दिख जाएंगे जो इस महामारी के समय में भी दलाली कर रहे हैं। ये रुपये के बदले लोगों को रक्त दिलाने की बात करते हैं और लोगों से खूब रुपये ऐंठ रहे हैं और इन सब पर स्वास्थ्य विभाग की आंखें बंद हैं।
250 रु. दाम है, दलाल ऐंठ रहे 10 से 15 हजार रुपये
मेडिकल ब्लड बैंक के सचिव डी. आशीष ने बताया कि रक्त के दलाल 250 रु. के दाम के 10 से 15,000 रुपये वसूल रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी ओर से पोस्टर लगाकर इन दलालों से बचने की अपील की जाती है, लेकिन इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।
प्रति वर्ष 15 लाख यूनिट रक्त की है मांग
डी. आशीष ने बताया कि प्रति वर्ष पश्चिम बंगाल में 15 लाख यूनिट रक्त की मांग है। स्वाभाविक समय में 13 लाख यूनिट तक कलेक्शन हो जाता था, लेकिन अभी तो मांग का 10% भी कलेक्शन मुश्किल से हो रहा है। प्रति दिन 4,000 यूनिट रक्त की आवश्यकता है जबकि कलेक्शन केवल 800 से 1000 यूनिट ही हो रहा है।
लैब नहीं खुले रहने के कारण भी हो रही समस्या
24 घण्टे लैब नहीं खुले रहने के कारण भी काफी समस्या हो रही है। किसी तरह अगर लोग डोनर को जुगाड़ कर रहे हैं तो इसके बावजूद लैब बंद रहने के कारण उनसे ब्लड कलेक्ट करने में समस्या हो रही है।
100 में 46% रक्तदान करती हैं राजनीतिक पार्टियां
100 में से 46% रक्तदान केवल राजनीतिक पार्टियां अथवा उनसे जुड़ी इकाईयां करती हैं। पहले हर शनिवार को कोलकाता पुलिस के विभिन्न थानों में रक्तदान होता था जो पिछले वर्ष कोविड के समय से बंद है। इन सब कारणों से भी रक्त की काफी कमी हो गयी है।
कोरोना के डर से लोग नहीं कर रहे हैं रक्तदान
ब्लडमेट नाम का एनजीओ चलाने वाले प्रियम ने कहा कि कोरोना के डर से लोग रक्तदान नहीं कर रहे हैं। 18 से 40 की उम्र के लोग सबसे अधिक रक्तदान करते हैं, लेकिन अभी वैक्सीनेशन भी चल रहा है, इस कारण लोग रक्तदान से पीछे हट रहे हैं। सामान्य तौर पर 30 लोगों को कहने पर एक व्यक्ति रक्तदान के लिए राजी हो जाता था, लेकिन अभी 50, 60 या 70 लोगों में एक व्यक्ति राजी हो रहा है। अभी कोई कोरोना के डर से तो कोई लॉकडाउन के कारण रक्तदान नहीं कर पा रहा है।
क्लब के सदस्य कर रहे हैं रक्तदान
रक्तदान का संकट मिटाने के लिए क्लब के सदस्य भी रक्तदान कर रहे हैं। कॉटन स्ट्रीट यंग ब्वायज क्लब के महेश शर्मा ने कहा​ कि उनके 500 सदस्यों के क्लब के 13 लोगों ने अब तक रक्त दिया है। उन्होंने कहा कि अभी कोई क्लब रक्तदान शिविर नहीं करवा पा रहा है जबकि पहले हर 3 महीने में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता था। पिछले 2 वर्षों में केवल 35 लोगों से ही हम रक्तदान करवा पाये हैं।
क्लबों से की गयी रक्तदान की अपील
हाल में स्वास्थ्य विभाग ने क्लबों के साथ बैठक की थी जिसमें क्लबों से अपील की गयी कि अगर वे इलाके में रक्तदान शिविर नहीं करवा पा रहे हैं ताे डोनर को ब्लड बैंकों में ले जाकर भी रक्तदान करवा सकते हैं। वहीं वेस्ट बंगाल ब्लड डोनेशन फोरम के कोलकाता यूनिट के स​चिव विकास जायसवाल ने कहा, ‘चुनाव की घोषणा होने के समय से ही रक्तदान शिविर बंद हैं। थैलेसेमिया के मरीजों को इस कारण काफी दिक्कत हो रही है क्योंकि हर महीने उनका ब्लड बदलना पड़ता है। हमारी कोशिश है कि कुछ संगठनों से आग्रह कर रक्तदान करवा रहे हैं। रक्तदान नहीं होगा तो ब्लड बैंकों में भला रक्त कैसे मिलेगा।’

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