मरीजों के जबड़े और आंख के अंदर की ह‌ड्डियों को खा रहा है ब्लैक फंगस

सिलीगुड़ी में ब्लैक फंगस की पहली शिकार महिला का भी ऊपरी जबड़ा और आंख हो गयी थी क्षतिग्रस्त
ब्लैक फंगस उसकी आंखों के अंदरुनी हिस्सों के साथ-साथ उसके ऊपरी जबड़े को खा चुका था
सिलीगुड़ीः ब्लैक फंगस(म्यूकोरमाइकोसिस) का कहर अब उत्तर बंगाल के विभिन्न स्‍थानों को अपनी जद में ले रहा है। वहीं म्यूकोरमाइकोसिस ने अब अपने को भी और तीव्र कर दिया। ब्लैक फंगस संक्रमण से पीड़ित मरीजों के जबड़े और आंख की मुलायम हड्डियों पर वार कर रहा है और उसे खा रहा है। ऐसे कई केस उत्तर बंगाल मेडिकल कालेज में आ चुका है। विशेषज्ञों ने बताया कि ब्लैक फंगस जबड़े की हड्डी खा रहा है। वहीं इस संक्रमण से पीड़ित लोगों में सबसे ज्यादा क्षति जबड़े के ऊपरी हिस्से और आंखों के अंदर की ह‌ड्डियों को पहुंच रही है। सिलीगुड़ी में ब्लैक फंगस से पीड़ित पहली महिला गायत्री पासवान(50) थी जिसके संक्रमण की पुष्टि होते ही डाक्टरों की टीम ने उसका आपरेशन कर उसके ऊपरी जबड़े और आंखों के कुछ हिस्सों को हटा दिया था। इसके बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका था। ब्लैक फंगस उसकी आंखों के अंदरुनी हिस्सों के साथ-साथ उसके ऊपरी जबड़े को खा चुका था। वहीं कुछ अन्य संदिग्‍ध मरीजों में भी इसका भयावह संक्रमण देखने को मिला। मरीजों के ऊपरी जबड़े और आंखों के साथ-साथ अन्य हिस्से भी बुरी तरह संक्रमित हो गये थे जिसके कारण ब्लैक फंगस और इससे संक्रमित करीब 17 मरीजों की मौत हो गयी।
बताया जाता है कि ब्लैक फंगस के मरीजों की रिकवरी रेट काफी कम है और उत्तर बंगाल मेडिकल कालेज में भर्ती 40 से अधिक मरीजों में 17 की मौत हो गयी। डाक्टरों की टीम ने बताया कि इनमें कुछ के आपरेशन भी किये गये और कुछ मरीज बेहद गंभीर हालत में उत्तर बंगाल मेडिकल कालेज सह अस्पताल में लाये गये थे जिसके कारण उन्हें इलाज के बावजूद बचाया नहीं जा सका।
उत्तर बंगाल मेडिकल कालेज सह अस्पताल के ईएनटी विभाग के कुछ डाक्टरों ने बताया कि ब्लैक फंगस का सीधा टारगेट लोगों के शरीर का नरम हिस्सा होता है। जबड़े की हड्डी शरीर के बेहद नरम हिस्सों में शामिल है। यही कारण है कि संक्रमित मरीजों के शरीर का यह हिस्सा बेहद प्रभावित होता है और ब्‍लैक फंगस इसे बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर देता है। शरीर के इस हिस्से को यह जल्दी चपेट में ले लेता है। विशेषज्ञों ने बताया कि ब्लैक फंगस मुंह के अंदर मसूड़े को भी क्षतिग्रस्त कर देता है जिससे दांतें गिरने की समस्या भी होती है। वहीं जबड़े में खून की आपूर्ति रुकने से भी दांतें गिरने लगती है।

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