बड़ी खबर : अंतत: नहीं सजा पटाखा बाजार , 6 हजार करोड़ रुपये का हुआ नुकसान

न्यायालय के दरवाजे पर आते-जाते बीत गए दिन पटाखा व्यवसायियों के
व्यवसायियों ने कहा, मंशा के तहत बर्बाद किया गया दिवाली का पर्व
सन्मार्ग संवाददाता
काेलकाता : क्या ग्रीन और क्या आम पटाखे, न्यायालय के दरवाजे पर आते-जाते कुछ ऐसे दिन बीते पटाखा व्यवसायियों के कि सज ही नहीं पाया कोलकाता में पटाखों का बाजार। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानते हुए कोलकाता हाई कोर्ट ने शर्तों के साथ ग्रीन पटाखा फोड़ने की छूट दी मगर एनओसी की लंबी प्रक्रिया आड़े आ गयी। सारा बांग्ला आतिशबाजी उन्नयन समिति के चेयरमैन बाबला रॉय ने इस बारे में सन्मार्ग को बताया कि हमारी तरफ से पूरी तैयारी कर ली गयी थी लेकिन आखिरी वक्त पर सब बर्बाद हो गया। इजाजत मिलने के बावजूद हमारे हाथ से मौका निकल गया इसलिए मजबूरन हमें बाजार नहीं लगाने का निर्णय लेना पड़ा।
सज गये थे स्टॉल्स, पीआईएल ने बाजार की हवा निकाल दी
बाबला रॉय ने बताया कि उनकी तरफ से बाजार पूरी तरह सज गया था। स्टॉल्स लग गये थे लेकिन हाई कोर्ट में पटाखा बैन के लिए दोबारा पीआईएल दाखिल कर दी गयी। इस याचिका पर आदेश आने में इतनी देरी हुई कि हम चाहकर कुछ नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि इसके लिए एनओसी प्रक्रिया में घंटों का वक्त लगता है जो हमारे पास नहीं है।
6 हजार करोड़ रुपये का हुआ नुकसान
चूंकि कोर्ट ने ग्रीन पटाखा फोड़ने का आदेश दिया है इसलिए पटाखा व्यवसायियों ने शिवाकाशी से खास पटाखे यहां मंगवाए थे। बाबला रॉय ने कहा कि पटाखों का बाजार न लगने के कारण उन्हें करीब 6 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है जिसकी भरपाई कैसे की जाएगी यह हमारे लिए सबसे बड़ी परेशानी है। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से अपील की है कि वे इस व्यवसाय से जुड़े करीब 31 लाख लोगों की पीड़ा को समझें और क्षतिपूरण के रूप में आर्थिक स्तर पर उनकी मदद करें।
बाजारों में खुदरा मिल रहे हैं पटाखे
पटाखा बाजार तो नहीं लगा है लेकिन कई जगह छोटी दुकानों में पटाखों की बिक्री हो रही है। हालांकि इनके दाम आसमान छू रहे हैं क्योंकि बेचने वाले और खरीदने वाले दोनों ही वाकिफ हैं कि दिवाली पर पटाखों का महत्व क्या है जबकि पटाखों का बाजार नहीं सज पाया है।
ग्रीन पटाखा नाम से लोग हो रहे आकर्षित
इस बार ग्रीन पटाखों को जलाने की छूट दी गयी है यानी ऐसे पटाखे जिसे जलाने से पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान न हो। इसके इतर ग्रीन पटाखों के नाम से ही लोगों में अलग तरह का आकर्षण है, जिज्ञासा है इस वजह से कि जहां भी स्थानीय स्तर पर पटाखे बिक रहे हैं लोग उसकी खरीदारी कर रहे हैं।

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