भवानीपुर : ‘घरेर मेये’ के लिए शुरू हुआ चुनावी प्रचार

विधानसभा पहुंचने के लिए ममता बनर्जी लड़ रही हैं इस सीट से चुनाव
तृणमूल का दावा, मार्जिन वोट से जीतेंगी ममता
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : बांग्ला चाय घरेर मेये…खेला होबे…एक बार फिर ये स्लोगन बंगाल की जनता की जुबान पर छाने वाला है क्योंकि ममता बनर्जी उपचुनाव में भवानीपुर से चुनाव लड़ने जा रही हैं। कहने को तो यह ममता की पुरानी सीट है लेकिन इस बार समीरकण कुछ अगल है। यह सीट इस बार विधानसभा पहुंचने के लिए ममता बनर्जी का जरिया है। शनिवार को यहां उपचुनाव की घोषणा हुई जिसे सुनने के बाद ही पूरे भवानीपुर में ममता बनर्जी के समर्थन में चुनावी प्रचार एक तरीके से शुरू कर दिया गया। पोस्टरिंग शुरू कर दी गयी। पूरे क्षेत्र को ममता के पोस्टर से पाट दिया गया जिसमें दीदी को जिताने और जीत का प्रबल दावेदार बताया गया है।
पार्टी का दावा, ममता की होगी मार्जिन जीत
तृणमूल के महासचिव पार्थ चटर्जी ने इस बारे में सन्मार्ग को बताया कि ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से मार्जिन वोट से जीतेंगी क्योंकि जनता को ममता बनर्जी ही अपनी मुख्यमंत्री के रूप में चाहिए। चुनाव आयोग ने सिर्फ भवानीपुर सीट में उपचुनाव के तारीख की घोषणा की है जिस पर खुशी जाहिर करते हुए पार्थ ने कहा कि आयोग को जो उचित लगा उसने किया। बाकी चार सीटों पर कब उपचुनाव होने हैं यह आयोग अपने हिसाब से तय करेगा। इसी तरह निकाय चुनाव को लेकर भी पार्थ ने कहा कि जब समय होगा आयोग यहां भी चुनाव करवाएगा।
भवानीपुर सीट ले जाएगी ममता को विधानसभा
ममता बनर्जी इस विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से उम्मीदवार थीं जिन्हें भाजपा के शुभेन्दु अधिकारी ने हराया था। हालांकि पार्टी की सर्वसम्मति से ममता मुख्यमंत्री तो बनी थीं लेकिन संवैधानिक नियमों के तहत 6 महीने के अंदर उपचुनाव में जीतकर ममता को विधानसभा की सदस्यता लेनी है। इसी के लिए भवानीपुर के विधायक व मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने इस सीट से इस्तीफा दिया तथा ममता बनर्जी को यहां से उम्मीदवार बनाकर उपचुनाव लड़ाया जा रहा है।
उन्नयन घरे घरे, घरेर मेये भवानीपुरे
ममता बनर्जी के प्रचार के लिए भवानीपुर में जयहिन्द वाहिनी की तरफ से समस्त तैयारियां की गयी हैं। दीदी के लिए नया स्लोगन तैयार किया गया है : उन्नयन घरे घरे, घरेर मेये भवानीपुरे यानी विकास घर घर, घर की बेटी भवानीपुर में। पिछले चुनाव में बांग्ला चाये नीजेर मेये यानी बंगाल को अपनी बेटी चाहिए स्लोगन खूब रमाया गया था, इसने काफी सुर्खियां भी बंटोरी थीं। अब देखने वाली बात है कि उन्नयन घरे घरे, घरेर मेये भवानीपुरे लोगों के जहन में किस हद तक घर करता है।

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