अपराधियों के लिए सेफ हाउस बनता जा रहा है बंगाल !

कोलकाता : शहर की भीड़ से दूर एक खाली इलाका। यहां पर रोजी-रोटी की तलाश में सैकड़ों लोग रहने आते हैं। ऐसे में शांत और एकांत इलाका होने के कारण इन इलाकों के आवसान को शहर के बाहरी इलाके के अपराधी सेफ हाउस के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। इन आवासनों में अधिकतर बिल्डिंग होने के कारण दलालों को ज्यादा रुपये देकर फ्लैट किराये पर लेकर अपराधी रहते हैं। दूसरे राज्य में अपराध करने के बाद ये यहां आकर शरण ले रहे हैं। पुलिस अधिकारियों की मानें तो बीते कुछ सालों में महानगर में छिपे दो दर्जन से अधिक अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से कोई जेएमबी का आंतकी था, तो कोई अलकायदा का। राज्य पुलिस के अधिकारी के अनुसार इस शहर में तीन बड़े रेलवे स्टेशन हैं। इन स्टेशनों से विभिन्न राज्यों के साथ यातायात संपर्क जुड़ा हुआ है। शहर से मात्र तीन घंटे की दूरी पर अंतरराष्ट्रीय सीमा है। ऐसे में बहुत ही सहजता से सीमा पार किया जा सकता है। महानगर में लाखों लोगों की भीड़ के बीच किराये पर फ्लैट लेकर रहना बहुत आसान है। हालांकि न्यूटाउन के सापूरजी आवासन में अपराधियों और पुलिस के बीच हुए एनकाउंटर की घटना बहुत ही कम हुई है।
कई बार बाहरी राज्यों के अपराधियों ने ली महानगर में शरण
उत्तर प्रदेश के कुख्यात डॉन बबलू श्रीवास्तव का दाहिना हाथ मंजित सिंह मांगे अपने दलबल के साथ दिसंबर 1998 में कोलकाता आया था। कोलकाता के एक व्यवसायी का अपहरण करना ही उनका उद्देश्य था। उसे पकड़ने के लिए पंजाब पुलिस की एक टीम कोलकाता आयी थी। ठंड के मौसम में सुबह के समय पंजाब पुलिस ने मंजित के साथी का पीछा कर उसे गोली मारी थी। हमले में मंजित भी घायल हो गया। उसी साल कोलकाता पुलिस के साथ बैंक डकैती के अभ‌ियुक्त वाज‌िद अकुंजिर का एनकाउंटर हुआ था। लेकटाउन के एक फ्लैट में वह छिपा हुआ था। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने वहां छापामारी की थी। ठीक उसी तरह जिस तरह न्यूटाउन में पुलिस ने रेड किया था। उस समय गोली लगने से पुलिस कर्मी मनोज दास घायल हो गए थे। हालांकि घायल पुलिस कर्मी ने अकुंजिर को नहीं छोड़ा। एक खुफिया अधिकारी के अनुसार इंडियन मुजाहिद्दीन का अन्यतम सदस्य यासिन भटकल भी एक समय कोलकाता में परिचय बदल कर छिपा हुआ था। मामूली चोरी की घटना में गिरफ्तार होने के बाद जमानत पर रिहा होते ही वह कोलकाता से भाग गया था। कई साल बाद पता चला कि उक्त चोर यासिन भटकल था। 30 साल पहले 1991 में खालिस्तानी संगठन से ताल्लुक रखने वाला एक दंपति कोलकाता में छिपा हुआ था। तिलजला में उसने घर किराये पर लिया था। इस बार भी यहां पंजाब पुलिस ने छापामारी की थी। उस वक्त भी दोनों गुटों के बीच हुई फायरिंग में दंपति की मौत हो गयी थी। 1993 में बब्बर खालसा संगठन का एक सदस्य भवानीपुर के बलराम घोष स्ट्रीट में छिपा हुआ था। उस समय दूसरे गुट के सदस्य ने उसे मार डाला था। वर्ष 2001 में तिलजला में खादिम के मालिक का अपहरण किया गया था। उस समय पता चला कि हुजी आतंकी संगठन का आफताब अंसारी कोलकाता को आतंकियों के सेफ हाउस के रूप में तैयार कर लिया है। इसके अगले साल जनवरी महीने में अमरीकन सेंटर पर हमले का अभियुक्त तिलजला और तपसिया में छिपा हुआ था ।
पुलिस सूत्रों के अनुसार वर्ष 2007 में एक आईटी कंपनी के ऑफिस में अल बदर नामक आतंकी संगठन ने हमला किया था। बाद में पुलिस को पता चला कि उस हमले में शामिल तीन लोगों में से एक का पासपोर्ट कोलकाता के बेंटिक स्ट्रीट के पते पर बनाया गया था। वर्ष 2009 में पाकिस्तान के रेंजर शाहबाज इस्माइल को फेयरली प्लेस से कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद वर्ष 2015 में आईएसआई के सदस्य अख्तर खान को जोड़ासांको से कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उससे पूछताछ कर गार्डनरिच से और दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उक्त लोग पाकिस्तान से आकर कोलकाता में छिपे हुए थे।

शेयर करें

मुख्य समाचार

काम की बात, किस दिन कौन सी दाल खाना शुभ

कोलकाता : हर व्‍यक्ति अपनी पसंद के अनुसार खाना खाता है, लेकिन ज्‍योतिष कहता है कि उसकी पसंद-नापसंद उसके जीवन पर भी अच्‍छा और बुरा आगे पढ़ें »

29 को कार्यकारिणी बैठक में हो सकते हैं अहम फेरबदल

भाजपा कार्यकारिणी की बैठक में शुभेंदु प्रधान वक्ताओं में किये गये शामिल सन्मार्ग संवाददाता कोलकाता : विधानसभा चुनाव के कारण लम्बे समय के बाद आगामी 29 जून आगे पढ़ें »

ऊपर