हिन्दीभाषियों के लिए बंगाल सरकार की बड़ी घोषणा

– हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के प्रोत्साहन के लिए 5 करोड़ रुपये आवंटित

– हिन्दी अकादमी को बजट के साथ-साथ प्रशासनिक अनुमोदन भी दिया

सन्मार्ग संवाददाता, कोलकाता : पश्चिम बंग हिन्दी अकादमी का पुनर्गठन करने के बाद अब राज्य के हिन्दीभाषियों के लिए बंगाल की ममता सरकार ने एक और अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हिन्दी अकादमी को प्रशासनिक अनुमोदन दे दिया गया है। इसके अलावा हिन्दी भाषा के प्रोत्साहन और हिन्दी साहित्य से जुड़े वि​भिन्न कार्यों हेतु आर्थिक आवंटन भी किया गया है। सरकार की ओर से कुल 5 करोड़ रुपये का आर्थिक आवंटन अकादमी को किया गया है। सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग के सचिव ने इस संबंध में आधिकारिक घोषणा की। आवंटन की सूचना देने वाले पत्र में उन्होंने लिखा कि हिन्दी अकादमी का कार्यालय बीबीडी बाग स्थित हेमंत भवन में होगा। इसमें जनरल एडुकेशन, लैंग्वेज डेवलपमेंट, प्रमोशन ऑफ मॉडर्न इंडियन लैंग्वेज और लिटरेचर के क्षेत्र से जुड़े कार्य शामिल रहेंगे। हिन्दी अकादमी को 5 करोड़ रुपये का आवंटन वर्तमान वर्ष के बजट में मांग नंबर 30 के तहत किया गया है।

हिन्दी भाषा-भाषियों पर ममता का विशेष ध्यान

गौरतलब है कि बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने पिछले दिनों हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य को प्रोत्साहन देने के लिए एक ओर जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिंदी अकादमी का पुनर्गठन करने की घोषणा की वहीं दूसरी ओर तृणमूल ने हिंदी प्रकोष्ठ का गठन किया। इन दो बड़े कदमों से राज्य में हिन्दीभाषियों की उम्मीद की किरण जगी है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह कहा गया है कि हिन्दी प्रकोष्ठ एक ऐसा मंच होगा जहां हिन्दी समुदाय के लोगों को भी प्रतिनिधित्व करने का पूरा मौका मिलेगा। हिन्दीभाषियों के हित में उनके सुझाव बेहद ही अहम माने जाएंगे। उनकी शिकायतों पर गंभीरता से गौर किया जाएगा।

दे सकते हैं सुझाव

हिन्दी प्रकोष्ठ और अकादमी की खासियत यह होगी कि अगर आपकी कोई शिकायत है, कोई सुझाव है तो वे अाप दे सकते हैं। बेहद ही अहम बात यह है कि राज्य में इस प्रकोष्ठ की भूमिका अहम होगी क्योंकि इसकी त्रिस्तरीय संरचना जिला स्तर से ब्लॉक स्तर तक काम करेगी। अब आप राजनीति से शिक्षा तक में हिन्दीभाषियों के लिए आगे बढ़कर काम करना चाहते हैं तो हिन्दी प्रकोष्ठ यह मौका देगा।

गौरव महसूस कर रहा है हिन्दी समाज

हावड़ा के रहने वाले कई हिन्दीभाषियों का कहना है कि राज्य में ऐसा सम्भवत: पहली बार हुआ जब हिन्दीभाषियों के लिए इतनी गंभीरता के साथ साेच विचार किया गया हो। बैरकपुर के रहने वाले कई लोगों ने इसे बेहतरीन कदम बताया है।

राज्य में यहां है अधिक हिन्दीभाषियों की संख्या

राज्य में मध्य कोलकाता, दक्षिण कोलकाता, उत्तर 24 परगना, हावड़ा, हुगली, सिलीगुड़ी, आसनसोल, दुर्गापुर, खड़गपुर सदर व राज्य के कुछ अन्य इलाकों में हिंदी भाषी आबादी निर्णायक भूमिका में है।

2011 से ही कईं कोशिशें

हालांकि हिन्दीभाषियों के लिए तृणमूल ने सत्ता में आने के साथ ही 2011 से ही कई कोशिशें करती आयी है। हिन्दी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने के अपने इरादे की सीएम ने घोषणा की थी। 2012 में यह साकार हुआ और 10 % से अधिक हिन्दीभाषी आबादी वाले जिलों व नगरपालिकाओं में हिन्दी को आधिकारिक भाषा बना दिया गया। 2019 में राज्य सरकार ने हिन्दी विश्वविद्यालय विधेयक पारित किया और हावड़ा में हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना की नींव भी रख दी गयी। इतना ही नहीं इससे पहले हिन्दी माध्यम जनरल डिग्री कॉलेज की भी सौगात मिली।

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