बंगाल का चुनावी संग्राम आखिर क्यों ले रहा दिलचस्प मोड़

राजनीति के सेंटर में रोज हो रही है हलचल
सत्ता की लड़ाई बनी मोदी मैजिक बनाम ब्रांड ममता
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : बंगाल में चुनाव तो होते आये हैं मगर 2021 का यह चुनावी संग्राम हर बार की तुलना में सबसे अलग या कहें रोजाना ट्वीस्ट एंड टर्न लाने वाला चुनाव साबित होने जा रहा है। बंगाल की राजनीतिक पृष्ठभूमि देखें तो कांग्रेस के कुछ सालों के शासन को वामो ने ऐसा रौंदा कि 34 सालों तक वाममोर्चा का किला हिलाने की कुबत​ किसी में भी न दिखी। 2011 में ममता बनर्जी ने परिवर्तन का नारा लगाया और उखाड़ फेंका वाममोर्चा के लाल झण्डों को जो आज भी दोबारा खड़े होने की जुगत में लगे हैं। अब 2021 है और बंगाल में चुनावी संग्राम शुरू हो चुका है। यह चुनाव सिर्फ चुनाव नहीं बल्कि तृणमूल और भाजपा की अस्मिता की लड़ाई बन चुका है जिसमें रोजाना एक नया दिलचस्प मोड़ देखने को मिल रहा है जो इस चुनाव को बाकी चुनावों से अलग साबित कर रहा है।
ह्वील चेयर की सियासत
बंगाल के राजनीतिक इतिहास या कहें देश में ऐसा पहली बार है कि किसी पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा ह्वील चेयर पर बैठकर चुनाव का प्रचार कर रहा है। नंदीग्राम में हादसे का शिकार होने के चार दिन बाद ममता बनर्जी मैदान में उतरीं। उनके पैर में प्लास्टर नजर आ रहा था, अंदाज अलग था। अमूमन ममता एग्रेसिव होकर बयान देती हैं मगर इस बार ममता इमोशनल स्पिच दे रही हैं, जिसमें वह अपना दर्द बता भी रही हैं और उससे जनता को सीधे जोड़ने की कोशिश भी कर रही हैं। कहना गलत न होगा कि इस बार ममता ज्यादा खतरनाक हो गयी हैं क्योंकि आते ही उन्होंने यह तो साफ कर दिया कि घायल बाघिन ज्यादा खतरनाक होती है। ममता के ह्वील चेयर की सियासत भाजपा के लिए भी मुद्दा बना है क्योंकि वह इसे सीधे ममता का इमोशनल कार्ड साबित करने में लगी है।
मोदी मैजिक के सामने ब्रांड ममता का सामना
हर मोड़ पर अलग रूप ले रहा बंगाल का चुनाव अब मोदी मैजिक बनाम ब्रांड ममता के बीच की लड़ाई बन चुका है। तृणमूल का मुख्यमंत्री चेहरा ममता बनर्जी हैं जो ब्रांड ममता के रूप में इस चुनाव में सामने आया है। दूसरी तरफ भाजपा है जिसके पास फिलहाल मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं है और यह पार्टी मोदी मैजिक के नाम पर बंगाल का चुनाव लड़ रही है। यानी बंगाल की सत्ता के लिए भाजपा मोदी के चेहरे पर जनता से वोट मांग रही है।
फ्लॉप शो की अलग राजनीति
तृणमूल और भाजपा दोनों ही इन दिनों चुनावी प्रचार में ताकत झोंक रही हैं। प्रचार की इस लड़ाई में भी दोनों ही पार्टियां एक-दूसरे की जनसभा को फ्लॉप शो साबित करने में लगी हैं। तृणमूल की ओर से सोशल मीडिया पर बताया जा रहा है कि केंद्रीय मं​त्रियों तक की सभा में लोग नदारद हैं जबकि भाजपा भी इसमें पीछे नहीं है। उनके नेता भी तृणमूल की सभाओं की ऐसी तस्वीरें पोस्ट कर रहे हैं जहां सभास्थल खाली पड़ा है।

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