आईटी व जीएसटी के छापे से परेशान हैं बंगाल के व्यवसायी

चुनावी माहौल में भाजपा के लिए पड़ सकता है भारी
कोलकाता : एक तो लॉकडाउन की मार ऊपर से बिजनेस का ग्राफ डाउन। इसके बाद अब आयकर व जीएसएटी का सख्त रवैया। बंगाल के अधिकतर व्यवसायियों को यह समझ नहीं आ रहा कि वे क्या करें। यह सब उस समय हो रहा है जब बंगाल विधानसभा का महत्वपूर्ण चुनाव सिर पर है। व्यवसायी वर्ग यूं तो भाजपा का समर्थक माना जाता है लेकिन आईटी और जीएसटी विभाग के रवैये से इसका उलटा हो सकता है। व्यवसाय वर्ग के कई लोगों से सन्मार्ग ने बात की तो सबका एक ही कहना था कि ऐसे माहौल में व्यवसाय कैसे होगा। भाजपा की केन्द्र सरकार से बहुत आशाएं थीं लेकिन आशाओं पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
नाम न बताने की शर्त पर बड़ाबाजार के कुछ व्यवसायियों का कहना है कि बार-बार रेड की खबरों से काफी परेशानी हो रही है। हमेशा भय का माहौल बना रहता है कि कहीं इस बार हमारी बारी तो नहीं है। इन दिनों रेड की घटनाएं काफी बढ़ गयी हैं। कभी आयकर की रेड तो कभी जीएसटी का तलाशी अभियान, इसके अलावा अन्य एजेंसियां भी हैं जो कि नजरें गड़ाई हुई हैं। इनका कहना है कि फिलहाल के लिए यह नहीं होना चाहिए, कम से कम व्यवसाय जगत कुछ महीनों में सेटल हो जाता फिर इनको जो करना था करते। अभी अगर सख्त रवैया अपनाएंगे तो व्यवसायियों की तो कमर ही टूट जाएगी। इन व्यवसायियों के मुताबिक कोरोना महामारी के दौरान जब भारत का खुदरा व थोक व्यापार दोबारा अपने आप को स्थापित करने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहा है, ऐसी स्थिति में जीएसटी, कर प्रणाली तथा आयकर विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई उन्हें समझ नहीं आ रही। एक तो जीएसटी में कई मनमाने संशोधनों के कारण इसका स्वरूप विकृत हो गया है और अब यह देश भर के व्यापारियों के जी का जंजाल बन गया है। इस तरह के संशोधनों का कड़ा विरोध कर तो रहे हैं लेकिन अगर विभाग को हमारे बारे में पता चलेगा तो हमारे ऊपर ही कार्रवाई करने लगेगा, इसलिए कुछ भी बोलने में डर लगता है।
नोटिसों के जरिये भी डराया जा रहा है ​
लॉकडाउन के बाद जैसे-जैसे स्थितियां ठीक हो रही हैं, वैसे-वैसे और भी परेशानियां बढ़ रही हैं। न सिर्फ रेड की समस्या है बल्कि रिटर्न न दिया टाइम पर तो नोटिस, कोई गलती हो गयी तो नोटिस, कोई दस्तावेज नहीं दिया तो नोटिस, इस तरह से आयकर व जीएसटी की टीम से व्यवसायी वर्ग परेशान हो रहा है। अभी तक बाजार की हालत नहीं सुधरी है। अगर प्रोडक्ट बिक्री ही नहीं होगा, सेवाएं दी ही नहीं जा सकेंगी तो फिर क्या टैक्स भरेंगे व्यवसायी। क्या टैक्स उगाही करने से ही देश का इकोनॉमिक डेवलपमेंट हो जाएगा, बड़ाबाजार के व्यवसायी यह सवाल पूछ रहे हैं ?
जीएसटी का मौजूदा स्वरूप बड़ा आंदोलन करवाएगा
जीएसटी की मार को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों से अक्सर आंदोलनों की खबर आती रहती है। अक्सर व्यवसायियों का समूह जीएसटी को लेकर आंदोलन करता रहता है। यह देशव्यापी आंदोलन की ओर बढ़ रहा है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली में कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आंदोलन करने की घोषणा भी की थी। इसके लिए विभिन्न राज्यों के व्यवसायियों को इसमें शामिल होने के लिए भी कहा गया था। आयकर व जीएसटी फाइल करने में देरी करने का खामियाजा न सिर्फ व्यवसायियों को बल्कि उपभोक्ताओं को भी उठाना पड़ रहा है। ऐसे में दोनों ही करदाताओं को टैक्स पेनाल्टी के साथ जमा करना पड़ रहा है। व्यापारियों को जीएसटी जल्द से जल्द फाइल करने के लिए कहा जा रहा है।
यह है इन व्यवसायियों का मुख्य आरोप
इनका कहना है कि अगर कोई जीएसटी के प्रारूप को देखे तो अब तक सैकड़ों बार इसमें सुधार किया गया है। वह भी ऐसा-वैसा नहीं बल्कि अमेंडमेंट करके। आखिर यह इतनी गलतियों से भरा है या फिर इतना इसमें सुधार हो रहा है तो फिर इसे जल्दीबाजी में लागू करने की क्या जरूरत थी। आराम से इसे लागू किया जा सकता था। इससे व्यवसाय का काफी नुकसान हो रहा है। दूसरी समस्या यह है कि हर बात पर पेनाल्टी या सजा। आर्थिक अपराधों में अगर हर छोटी-छोटी भूल पर पेनाल्टी या फिर सजा हो तो फिर व्यवसायी परेशान हो जाते हैं। डरने से और गलतियां होने लगती हैं और उनमें फंसना स्वाभाविक है।

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