बारासात के समलैंगिक जोड़े को मिल रही परिवार से धमकी, पुलिस से लगाई सुरक्षा की गुहार

Gay couple wants police protection

कोलकाता : भारत के उच्चतम न्यायालय ने पिछले वर्ष ही धारा 377 पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा था कि समलैंगिकता अब अपराध नहीं है। यह फैसला 6 सितंबर 2018 को पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने लिया था जिसके तहत समलैंगिकों को भी अन्य महिलाओं व पुरुषों की तरह ही समाज में समानता व सम्मान की जिंदगी जीने का पूरा अधिकार दिया गया। लेकिन समाज की मानसिकता एक फैसले से नहीं बदली जा सकती। इसी बात का समर्थन करती एक घटना पश्चिम बंगाल के बारासात जिले से सामने आयी है जहां एक समलैंगिक जोड़े को उनके अपने परिवार वाले ही जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। इस जोड़े को अपनी सुरक्षा के लिए जिला पुलिस से गुहार लगानी पड़ी है।

‘मैं सुरक्षित महसूस नहीं करता

पश्चिम बंगाल के बारासात के रहने वाले एक समलैंगिक जोड़े ने अपनी सुरक्षा के लिए जिला पुलिस से मदद मांगी है। इस जोड़े ने पुलिस को अपने परिवार से खतरा होने की सूचना दी है। उनमें से एक ने बताया कि मेरे पिता ने मुझे जान से मारने की धमकी दी है। मेरा परिवार मुझे इस तरह से स्वीकार नहीं करना चाहता। मैं सुरक्षित महसूस नहीं करता हूं। मेरे साथी की जान भी खतरे में है।

‘जबरन एक लड़की से कराना चाहते थे शादी

पीड़ित ने बताया कि जब मैंने अपने परिवार को समलैंगिक होने की जानकारी दी तो उन्होंने मुझे पीटना शुरू कर दिया और जबरन मेरी शादी एक लड़की के साथ करनी चाही। लेकिन मैं यह शादी नहीं करना चाहता। मेरे पिता ने मुझे धमकाने की कोशिश की। वे मुझे मनोचिकित्सक के पास भी ले गए और जब उसने भी मेरे समलैंगिक होने की पुष्टि की तो भी मेरा परिवार इस बात को स्वीकार नहीं कर पाया।

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