हावड़ा नगर निगम से अलग नहीं होगी बाली नगरपालिका

प्रशासन ले सकता है बड़ा फैसला
हावड़ा : साल 2018 के 10 दिसम्बर को हावड़ा नगर निगम की मियाद खत्म हो गयी थी। इसके बाद से हावड़ा नगर निगम राम भरोसे हिन्दू होटल की तरह चलाया जा रहा है। अब यहां पर बोर्ड अॉफ एड​मिनिस्ट्रेटर बनाया गया, इसमें शहरी इलाकों के विधायक शामिल हैं। इस बोर्ड का राज्य के मंत्री व हावड़ा मध्य के विधायक अरूप राय को चेयरमैन बनाया गया। इसके बाद लोगों में अब उम्मीद जगी कि हावड़ा नगर निगम लोगों के लिए काम करेगा। इधर निगम क्षेत्र में डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी, निकासी की बेहाल व्यवस्था व हर जगह कचरों का अंबार ही दिखाई देने लगा था, परंतु अरूप राय ने निगम का दायित्व लेते हुए हावड़ा शहर को अग्रसर गति दी। हालांकि अब तक निगम में ​फिर से चुनाव नहीं हुए हैं, लेकिन लोगों को अब भी निगम चुनाव कब होंगे, उसका ही इंतजार है। इसके साथ ही एक सुगबुगाहट यह उठ रही थी कि एक बार फिर से बाली पालिका को नगर निगम से अलग कर वार्डों को 16 से 34 कर दिया ​जायेगा, परंतु अब प्रशासन शायद इस पर बड़ा फैसला ले सकता है। आगामी विधानसभा के उपचुनाव के बाद ही निगम का चुनाव संभव है। ऐसे में जल्द ही कोई बड़ी घोषणा हो सकती है।
साल 2015 में बाली को​ मिलाया गया था निगम से
साल 2015 में नगर निगम के चुनाव के पहले 132 साल पुरानी बाली नपा को हावड़ा निगम में मिलाया गया था। पुराने बोर्ड में 35 वार्ड थे लेकिन तृणमूल के शासनकाल में इन वार्डों को कम करते हुए 16 वार्ड कर दिया गया। इसका प्रभाव लोकसभा चुनाव पर हुआ और इनमें से 9 वार्डों में तृणमूल को जीत हासिल हुई थी। परंतु निगम में मर्ज होने के कारण साल 2018 में ही मियाद खत्म होने के बाद 16 पार्षद इलाके के लिए ठीक से कुछ काम नहीं कर पाये।
निगम से बाली को अलग करने के लिए तैयार किया गया था ब्लू प्रिंट
2019 के जून महीने में राज्य सरकार की ओर से बाली नगरपालिका को एक बार फिर हावड़ा नगर निगम से अलग करने का निर्माण किया जा रहा था। इसके लिए निगम की ओर से रूपरेखा भी तैयार हो रही थी। नये तौर पर तैयार होनेवाली बाली नगरपालिका में कितने वार्ड होते और क्या-क्या नई गतिविधियां होतीं, इसे लेकर एक ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा था।
लोगों की ली जा रही है राय
निगम से बाली नपा को अलग करने के निर्णय को लेकर प्रशासन ने गुप्त तरीके से बाली के लोगों की राय जाननी चाही थी। इसमें लोगों ने पत्र देकर अपील की है कि बाली को फिर से निगम से अलग नहीं किया जाये, क्योंकि इसके कारण छोटी-छोटी असुविधाएं सामने आयेंगी। इसमें डेथ सर्टिफिकेट बना हो या फिर म्यूटेशन करवाना हो, हर काम के लिए इधर उधर नहीं करना होगा। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि बाली को अगर अलग किया जाये तो क्षेत्र भी छोटे हो जायेंगे। इससे काम ठीक से नहीं होंगे और लोगों को भरोसे रहना होगा। लोगों का कहना है कि निगम में मर्ज होने के बाद ही बाली का विकास संभव हो पाया है।
यह कहना है पूर्व पार्षदों का
इस बारे में पूर्व पार्षद कैलाश मिश्रा ने कहा कि उन्हें इस बारे में हालांकि कोई जानकारी नहीं है, लेकिन लोगों की बातों से यह जानकारी मिलती है कि लोगों को निगम से अलग होने पर कोई खुशी नहीं है। वहीं बोर्ड ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर के चेयरमैन अरूप राय के नेतृत्व में बेहतरीन कार्य हो रहे हैं। पूर्व पार्षद रियाज अहमद ने कहा कि उनके वार्ड के लोग भी यही मानते हैं। अगर बाली नपा अलग होती है तो ​दिक्कतें होंगी। वोट बागान में पानी की समस्या का समाधान हुआ, निकासी व्यवस्था सुदृढ़ हुई, यहां तक कि स्कूल का भी निर्माण किया गया। सबसे बड़ा काम यह है कि निगम में रहने से सारे काम एक आईएएस अधिकारी टैक्कल करते हैं मगर पालिका में यही काम डब्ल्यूबीएएस के भरोसे रहना पड़ता है। इससे काम में भी देरी होता है, इसलिए फिर से अलग नहीं होना ही बेहतर होगा।

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