राज्यः आरटीओ में बनेंगे ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक

  • परिवहन विभाग तैयार कर रहा योजना
  • होगी आवेदकों को सहूलियत

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाताः राज्य के सभी आरटीओ कार्यालयों के पास आगामी दिनों में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक बनाने की योजना है। परिवहन विभाग के सूत्रों की मानें तो यह ट्रैक विभिन्न प्रकार के सेंसर से लैस होंगे जो कि परीक्षण के दौरान ड्राइवर द्वारा की गई किसी भी गलती को तुरंत दर्शाएंगे है। ट्रैक मल्टी कैम सेट अप द्वारा कवर किया जाएगा, जो हर एक परीक्षण की वीडियो रिकॉर्डिंग रखता है।
परीक्षण के दौरान मानवीय हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं होगी। एक बार परीक्षण शुरू होने के बाद, सब कुछ स्वचालित और सेंसर और सेल्फ टाइम डिवाइस द्वारा संचालित होगा। यह सभी शिक्षार्थियों के कौशल का परीक्षण करने में बहुत उपयोगी साबित हो सकेगा। इसका अंतिम उद्देश्य वास्तविक योग्य ड्राइवरों को लाइसेंस देना है। इस प्रकार ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक होने से काफी सुविधाएं लोगों को हो सकेंगी। सूत्रों की मानें तो राज्य परिवहन विभाग जल्द ही आरटीओ में ड्राइविंग टेस्ट के लिए एक विशेष ट्रैक स्थापित करने पर विचार कर रहा है।
परंपरागत टेस्टिंग ट्रैक से होंगे अलग
स्वचालित ट्रैक पर परीक्षण बहुत अधिक कड़े होते हैं। पारंपरिक परीक्षणों के विपरीत, जिसमें डीएल आवेदकों को एक मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर की उपस्थिति में यातायात के बीच एक ट्रैक पर ड्राइव करना पड़ता है, स्वचालित ट्रैक कठिन ड्राइविंग परिस्थितियों का अनुकरण करते हैं। सूत्रों की मानें तो ड्राइविंग परीक्षण के लिए एक स्वचालित ट्रैक की बातचीत शुरुआती चरण में है। ड्राइविंग टेस्ट के लिए ऑटोमेटेड ट्रैक बनाने में कुछ समय लगेगा। वर्तमान समय में परिवहन विभाग से ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने के लिए, आवेदक ऑनलाइन आवेदन करते हैं और संबंधित दस्तावेज जमा करते हैं। आवेदक को क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) से लर्नर ड्राइविंग लाइसेंस मिलता है। आवेदक को बाद में आरटीओ अधिकारी ड्राइविंग टेस्ट के लिए एक तारीख और समय स्लॉट देते हैं। अगर व्यक्ति टेस्ट पास कर लेता है तो उसे ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर दिया जाता है। फेल होने पर उन्हें दोबारा आवेदन करना होता है और दोबारा परीक्षा देनी होती है। पहले पीवीडी बुक फॉर्मेट में ड्राइविंग लाइसेंस जारी करता था। पहले पेज पर लाइसेंस धारक का फोटो और बाकी का विवरण अन्य पेजों में होता था। हाल ही में, सार्वजनिक वाहन विभागों (कसबा और बेलतल्ला) ने ड्राइविंग लाइसेंस प्रारूप को स्मार्ट कार्ड ड्राइविंग लाइसेंस से पेपर फॉर्म में बदल दिया है। इससे काफी सहूलियत बढ़ी है।

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