‘आफत’ में भी जान जोखिम में डालकर डंटे रहे सेना के जवान

लगभग 700 लोगों को बचाया गया
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : अत्यंत भयंकर चक्रवात ‘यास’ ने पश्चिम बंगाल के दीघा समेत उत्तर व दक्षिण 24 परगना के कई निचले इलाकों में तबाही मचायी। भयावह रूप लेकर जब यास आया तो समुद्र के ऐसे विकराल रूप की कल्पना भी किसी ने नहीं की होगी। समुद्र का पानी गांव के विभिन्न इलाकों में घुस गया और इस कारण लोगों ने कहीं अपने घरों की छतों में शरण ली तो कहीं किसी ऊंचे स्थान पर जाकर लोग मदद मांगते रहे। इस आपदा के बीच जान जोखिम में डालकर काम किया सेना के जवानों ने। वे ‘दूत’ बनकर आये और लोगों की सहायता की। कई गांवों में तो कमर तक पानी भर गया था जहां लोग फंस चुके थे। वहां सेना के जवान पहुंचे और रस्सी बांधकर लोगों को गहरे पानी से निकाला। सेना के कुल 17 कॉलम की तैनाती पश्चिम बंगाल के वि​भिन्न हिस्सों में की गयी थी। इन कॉलम में स्पेशियलाइज्ड आर्मी पर्सनल उनके सभी उपकरणों के साथ मौजूद रहते हैं। सेना के जवानों ने डीएम घाट में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। दीघा कॉलम तालगाछारी ग्राम पंचायत में गयी और वहां से भी फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला। तालगाछारी गांव दीघा टाउन से लगभग 9 कि.मी. की दूरी पर है। पूर्णिमा के कारण ज्वार आने से सेना को राहत कार्यों में दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन बगैर रुके और थमे सेना के जवान डंटे रहे और उन्होंने फंसे हुए लोगों काे सुरक्षित बाहर निकाला। इसके अलावा हावड़ा के ग्रामीण इलाके में भी सेना ने राहत कार्य किया। शाम तक राहत कार्य चला और लगभग 700 लोगों को सेना के जवानों ने सुरक्षित बाहर निकाला। लोगों ने भी सेना के कार्यों की खूब प्रशंसा की। लोगों ने कहा कि अगर सेना के जवान सही समय पर आकर हमें नहीं बचाते तो न जाने हमारा क्या होता। ये जवान ‘भगवान’ बनकर हमें बचाने आये।

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