दोबारा ‘सख्ती’ की घोषणा ने रुला दिया है छोटे व्यापारियों को

कपड़ा दुकानों को कुछ घण्टे के लिए खोलने की मांग
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने लॉकडाउन जैसी सख्ती को आगामी 15 जून तक के लिए बढ़ा दिया है। 15 जून तक सख्ती बढ़ाये जाने के कारण अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। विशेषकर कपड़ा व्यवसाय की बात करें तो हर रोज यहां करोड़ों का टर्नओवर होता है, ऐसे में पहले 15 दिन और अब फिर 15 दिन कपड़ा दुकानें बंद रहेंगी तो नुकसान का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस बार 15 जून तक हुई सख्ती ने तो छोटे व्यापारियों को जैसे रुला ही दिया है। ऐसे में बड़ाबाजार के कपड़ा व्यवसायियों ने राज्य सरकार से मांग की है कि कम से कम कुछ घण्टों के लिए कपड़ा दुकानों को इसमें राहत दी जाए।
लगभग 25 कटरें हैं बड़ाबाजार में, ठप है रोजाना होने वाला करोड़ों का कारोबार
राजा कटरा, विलास राय कटरा, सदासुख कटरा, पंजाबी कटरा जैसे बड़ाबाजार में लगभग 25 कटरे हैं जहां रोजाना करोड़ों का कारोबार होता है। हालांकि गत 15 मई से बड़ाबाजार के सभी कटरे बंद हैं।
क्या कहते हैं बड़ाबाजार के व्यवसायी
विलास राय कटरा में लगभग 1200 दुकानें हैं। व्यवसायी लल्लू मिश्रा ने कहा, दुकानें बंद होने के कारण मध्यमवर्गीय दुकानदारों के साथ ही मजदूरों को भारी परेशानी हो रही है। दिहाड़ी मजदूरों के लिए भी अब खाने की भी नौबत आ गयी है। विलास राय कटरा के केयरटेकर नन्हें शुक्ला ने कहा, यहां लगभग 30 से 35 मजदूर रहते हैं जिनके खाने – पीने की व्यवस्था किसी तरह की जा रही है। बारिश के कारण कई दुकानों में पानी चला गया है और दुकानदार अपनी दुकानें भी देखने नहीं आ पा रहे हैं। महेंद्र प्रकाश शुक्ला ने भी कुछ घण्टे के लिए दुकानें खोलने की मांग की ताकि कम से कम दुकानदारी भी चले और मजदूरों का भी पेट भर जाए। इसी तरह भजनलाल कटरा में लगभग 70 दुकानें हैं जहां के व्यवसायियों बलजीत सिंह, श्याम अग्रवाल और गोपाल मिश्रा ने कहा कि कुछ घण्टे के लिए दुकानें खोलने दी जाएं ताकि हमारी आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार हो सके। पंजाबी कटरा में 100 से अधिक दुकानें हैं, यहां के व्यवसायी अजीत वर्मा ने कहा कि उनकी साड़ी की दुकान है, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन द्वारा दुकान खोलने नहीं दी जा रही है। अंतिम बार गत 15 मई को एक घण्टे के लिए उन्होंने दुकान खोली थी, लेकिन एक घण्टे में ही दुकान बंद करवा दी गयी। इसी तरह एक और साड़ी दुकानदार राजन गुप्ता ने भी कहा कि साड़ी की दुकानें भी नहीं खोलने दी जा रही हैं जबकि दोपहर 12 से 3 बजे तक साड़ी की दुकानें खोलने देने के लिए कहा गया था।
‘दुकानें खुलेंगी तो हमारा भी पेट भरेगा’
यहां काम करने वाले दिहाड़ी मजदूर राजा माझीने कहा कि काफी मुश्किल हो रही है। दुकान नहीं खुलेगी तो हमारा काम कैसे चलेगा। महेंद्र भगत ने कहा कि हमें खाने-पीने की दिक्कतें हो रही हैं, रहने का तो यहां रह जाते हैं, लेकिन खाना-पीना काफी मुश्किल से हो रहा है। राम सागर शुक्ला की चाय की दुकान है, उन्होंने कहा कि कम से कम 3 घण्टे के लिए दुकानें खोलें क्योंकि पहले ही लॉकडाउन से मध्यम वर्ग ने मार खायी है। गणेश सिंह ने भी कुछ घण्टों के लिए दुकानें खुलवाने की मांग की।
क्या कहना है व्यावसायिक संगठनों का
इस बारे में सेंट्रल कोलकाता मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ओमप्रकाश पोद्दार ने बताया कि पहले से ही कपड़ा व्यवसाय लॉकडाउन की मार झेल रहा है। गत वर्ष भी लॉकडाउन के कारण व्यवसायियों को काफी नुकसान हुआ था और अब फिर सख्ती के कारण काफी दयनीय स्थिति में व्यवसायी पहुंच गये हैं। ऐसे में हमारी मांग है कि कम से कम दोपहर 12 से 3 बजे तक कपड़ा दुकानों को खाेलने दिया जाए। इसी तरह चेम्बर ऑफ टेक्सटाइल, ट्रेड एण्ड इंडस्ट्री (कोट्टी) के अध्यक्ष अरुण भुवालका ने कहा, ‘दुकानें कुछ घण्टे के लिए खोलने दी जाए, ये हमारी मांग है। इसे लेकर हम प्रशासन से भी बात करेंगे कि कोविड प्रोटोकॉल मानते हुए दुकानों को खोलने दिया जाए।’

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