सिंगर केके की हार्ट अटैक से मौत के बाद डॉक्टरों ने युवाओं को किया सचेत

समय पर अस्पताल पहुंचाने से बच सकती थी केके की जान
डॉक्टरों ने कहा, बेहद लापरवाही बरती गयी
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : अधिकतर युवाओं के पसंदीदा सिंगर केके की हार्ट अटैक से मौत के बाद अब डॉक्टरों ने युवाओं को सचेत किया है। इन दिनों कामकाज, पढ़ाई, नौकरी व दिन प्रतिदिन बढ़ रहे स्ट्रेस के कारण हार्ट की समस्या स्वाभाविक हो गयी है। इसके लिए डॉक्टरों ने हृदय का खास ध्यान रखने को कहा है, साथ ही हेल्थी लाइफ स्टाइल अपनाने को भी कहा है। गत शाम को कन्सर्ट के बाद उन्हें होटल ले जाया गया था तथा इसके बाद होटल में उनकी तबीयत बिगड़ी तो उन्हें सीएमआरआई रात 10.30 बजे ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस बारे में महानगर के जानेमाने हार्ट स्पेशियलिस्ट का कहना है कि अगर सही चिकित्सा समय पर मिली होती तो उनकी जान बचायी जा सकती थी। जब परफॉर्मेंस के दौरान उन्हें असहज देखा गया, तो फिर उन्हें होटल क्यों ले जाया गया, उसी वक्त उन्हें अस्पताल ले जाना चाहिए था। वहीं हार्ट अटैक के सारे लक्षण देखने के बावजूद होटल से पास के अस्पताल में न ले जाकर दूर के अस्पताल में ले जाना, समय की बर्बादी करना भी घातक साबित हुई।
‘बाहर से फिट होने का मतलब स्वस्थ है जरूरी नहीं’
एसएसकेएम के सीनियर कार्डियोलाजिस्ट डॉ. सरोज मंडल ने कहा कि अगर कोई जिम जाता है, या फिर बाहर से फिट दिखता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप स्वस्थ हैं। स्वस्थ होने की परिभाषा कोरोना के बाद बदल गयी है। सभी को हेल्थ चेक अप करवाते रहना चाहिए। कोई भी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय डॉक्टर ए.पी.जे अब्दुल कलाम से लेकर केके तक जिस किसी की भी मृत्यु अचानक कुछ मिनटों में हुई है, उन मामलों में देखा गया है कि इन्हें वेंट्रिकुलर अरिथ्मिया हुआ है। यह ऐसी स्थिति है जब कई बार देखा गया है कि एनजियोप्लास्टी के दौरान भी मरीज इसकी चपेट में आ जाता है। यह एक ऐसी स्थिति होती है जब हार्ट बीट काफी एबनार्मल हो जाती है और धड़कन कई बार 200 से 300 तक चली जाती है। इससे हृदय का लोअर चेम्बर पर अधिक दबाव पड़ता है और दुगनी रफ्तार में पंप करने लगता है। इससे हार्ट से शरीर में ब्लड सप्लाई होना कम या बंद हो जाता है।
ये लक्षण काफी कॉमन हैं
अरिथ्मिया कई प्रकार के होते हैं लेकिन इनका लक्षण काफी कॉमन है। इनमें चेस्ट पेन, चक्कर आना, सिर दर्द, बेहोश हो जाना, सांस लेने में दिक्कत, धड़कन का अचानक अधिक होना। वहीं हार्ट अटैक आने पर हाथ, कंधे, कमर, गर्दन, जबड़े में दर्द आदि लक्षण हैं।
‘एक ईसीजी या बीपी तक चेक नहीं किया गया, यह सिर्फ जंगल या गांव में ही संभव है’
जानेमाने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. कुणाल सरकार ने बताया कि यह हमारे शहर के लिए दुर्भाग्य की बात है कि यहां उनके द्वारा तबीयत खराब की शिकायत करने बाद एक ईसीजी या बीपी तक चेक नहीं किया गया। इवेंट में ही पसीने से तरबतर वे दिख रहे हैं, असहज हैं, फिर भी इवेंट के बाद होटल ले जाया गया। कार्यक्रम के दौरान ही उनकी तबीयत बिगड़ गयी थी, इसे दरकिनार कर लगभग 2.30 घंटे की समय की बर्बादी की गयी फिर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, वह भी दूर के अस्पताल में न कि होटल के करीब के अस्पताल में, ऐसी लापरवाही बरतना उनकी मौत का कारण बन गयी। डॉ. सरकार ने कहा कि मौत किसी की कभी भी हो सकती है लेकिन अगर बिना चिकित्सा की मौत हो तो यह सिर्फ जंगल में या फिर गांव में ही संभव है। कोलकाता जैसे स्मार्ट सिटी में बिना चिकित्सा के एक कलाकार का चले जाना, किसी का उन्हें बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं करना, बेहद दुर्भाग्यजनक है।

सिंगर केके काफी फिट थे, डायट भी बैलेंस लेते थे
​सिंगर केके अब नहीं हैं लेकिन उनके जानने वालों को अभी भी यह यकीन नहीं हो रहा है। इनका कहना है कि अगर कोई बिल्कुल फिट हो या फिर नियमित डायट फॉलो करता हो तो फिर उसे कैसे हार्ट अटैक आ सकता है ? उनके करीबी दोस्तों का कहना है कि उनका नियमित शेड्यूल एक आइडियल था। वे ट्रेडमिल स्प्रिंट की तरह कार्डियो और बाइसेप्स और लेग एक्सरसाइज करना भी पसंद करते थे। उनके दिन की शुरुआत सुबह 3-4 ग्लास गर्म पानी से होती थी, उसके बाद उबले अंडे और फल खाते थे। उनका नाश्ता हेल्दी होता था, जिसमें अनाज व दलिया लेना पसंद करते थे। उनके दोपहर के भोजन में सलाद व कुछ ग्रिल्ड सब्जियां जरूर शामिल होती थीं। रात के खाने में वह ज्यादातर दाल और चावल तो कभी रोटी खाते थे तो कभी कुछ हेल्दी खाते थे। डायट चार्ट को पूरा फॉलो करने वाला आखिर कैसे कुछ घंटों में दुनिया को अलविदा कह गया, यह चौंकाने वाला है।
क्या कोविड का दौर है जिम्मेदार ?
इस बारे में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के एसोसियेट प्रो. डॉक्टर इमरान अहमद ने कहा कि अब तक के रिसर्च पर ध्यान दें तो कोविड के दौर के बाद लोगों के स्वास्थ्य में काफी बदलाव हुआ है लेकिन अभी भी हार्ट अटैक के मामलों में कोविड जिम्मेदार है ​कि नहीं यह कोई रिसर्च कह नहीं पा रहा है। अगर ​किसी व्यक्ति की मौत अचानक 12 घंटे के भीतर होती है तो वेंट्रिकुलर टैकिकार्डिया एक कारण हो सकता है। इसमें व्यक्ति को तुरंत ट्रिटमेंट की जरूरत होती है, हार्ट की थिकनेस व पपिंग में समस्या के कारण इससे ब्रेन व बॉडी में ब्लड जाना बंद हो जाता है। हार्ट अटैक के इस परिस्थिति में मौत तुरंत हो जाती है।
अत्यधिक गर्मी भी बन सकती है हार्ट अटैक का कारण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गर्मी भी दिल के दौरे का कारण बन सकती है। बहुत अधिक गर्मी रक्तचाप को कम कर सकती है जिससे हृदय तेजी से धड़कने लगता है, जिससे व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ने का खतरा रहता है। अत्यधिक गर्मी की स्थिति में, शरीर के तापमान को सामान्य करने के लिए अधिक रक्त पंप करने के लिए हृदय पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

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