कोरोना के बाद ग्राउंड हैंडलिंग के क्षेत्र में अब हो रहा है सुधार

कोलकाता के बाद कालीकट एयरपोर्ट पर इंडो थाई एयरपोर्ट मैनेजमेंट सर्विस प्राइवेट लिमिटेड ने शुरू किया काम
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कोरोना के बाद ग्राउंड हैंगडिंग के क्षेत्र में अब धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। उड़ानों के बढ़ने के कारण ग्राउंड हैंड​लिंग के क्षेत्र में भी अब विकास हो रहा है। यह कहना है जानीमानी ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी इंडो थाई कालीकट प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर श्याम मालानी का। कंपनी ने गत गुरुवार को कालीकट एयरपोर्ट पर भी अपनी ग्राउंड हैंड​लिंग की सेवाएं देनी शुरू कर दी हैं। उन्होंने कहा कि यह एयरपोर्ट हमारे लिए खास है क्योंकि यह टेबल टॉप की तरह है। पहाड़ों के बीच स्थित केरल को धरती का स्वर्ग कहते हैं और यहां आकर काम करके हमें बेहद अच्छा लग रहा है। इससे पहले एयर इंडिया अपनी ग्राउंड हैंडलिंग की सेवाएं देती थीं। यहां पर संसाधन सीमित है लेकिन फिर भी घरेलू उड़ानों से ज्यादा यहां विदेशी उड़ानें संचालित होती हैं।


कालीकट से डायरेक्ट नहीं है कोलकाता के लिए उड़ान
उन्होंने कहा कि कालीकट से कोलकाता के लिए डायरेक्ट उड़ानें नहीं हैं लेकिन कालीकट से दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई तथा हैदराबाद जैसे स्थानों के लिए उड़ानें संचालित हो रही हैं। वहीं विदेशी गंतव्यों में दुबई, शारजहां, कुवैत, अबुधाबी व जेदाह जैसे गुल्फ देशों के लिए उड़ानें सबसे अधिक हैं। उन्होंने कहा कि कालीकट एयरपोर्ट से घरेलू उड़ानों की संख्या 25 फीसदी तो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या 75 फीसदी है। कालीकट से जहां प्रतिदिन 5 से 10 उड़ानें घरेलू संचालित होती हैं तो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या 10 से 15 की है। इंडो थाई एयरपोर्ट मैनेजमेंट सर्विसेस लिमिटेड की बात करें तो फिलहाल जयपुर, गुवाहाटी, कोलकाता, ओजर तथा कालीकट में ग्राउंड हैंडलिंग की सेवाएं दी जा रही हैं। वहीं अमृतसर, भुवनेश्वर, गया, पुणे व वाराणसी की जिम्मेदारी मिल गयी है। जल्द ही इन स्थानों पर भी काम शुरू किया जाएगा।
धीरे-धीरे उभर रही है इंडस्ट्री
कोरोना की मार झेल चुकी यह इंडस्ट्री अब उबर रही है। विदेशों की तुलना में भारत में इसमें काफी सुधार हुआ है। हवाई यात्रा के सुचारू संचालन के लिए महत्वपूर्ण हवाईअड्डा ग्राउंड-हैंडलिंग कंपनियां महामारी के दौरान नौकरी गंवा चुके कर्मियों को फिर से लिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि एयरपोर्ट पर ग्राउंड हैंडलिंग के लिए एक विशाल निवेश किया गया है जो कि 1000 करोड़ से काफी अधिक का है और कोरोना के दौरान उड़ानों की संख्या शून्य तक हो गयी थी। इससे राजस्व का भारी नुकसान हुआ था। यही कारण है कि कुछ कंपनियों को कर्मियों का वेतन, रेंटल, इंटरेस्ट तथा एयरपोर्ट आपरेटरों का खर्चा उठाने में बेहद मुश्किल का सामना करना पड़ा था। अब इससे धीरे-धीरे यह इंडस्ट्री उबर रही है।

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