अफगान के लोग लड़ाकू होते हैं, इस बार भी तालिबान से जीतेंगे

कोलकाता में रहनेवाले अफगानी लोगों ने कहा..
अफगानिस्तान संकट के बीच कोलकाता के अफगानी फिक्रमंद
कोलकाता के मैदान इलाके में प्रार्थना में 50 अफगानी हुए शामिल
कोलकाता : रविवार को जैसे ही तालिबान के काबुल में प्रवेश करने की खबर आई, वैसे ही आमिर खान दिलदार की धड़कनें तेज हो गईं। काबुल से हजारों मील दूर कोलकाता के रहनेवाले आमिर इन दिनों बिहार के कट‌िहार में मौजूद है। तीनदिनों से उनकी तबीयत भी काफी खराब है। इसके बावजूद आमिर कहते हैं कि अफगान के लोग लड़ाकू होते है, इस मुश्क‌िल समय से बाहर निकल आएंगे। उन्होंने कहा कि तालिबान के पॉवरफूल होने के पीछे सबसे बड़ा हाथ पाकिस्तान का है। आमिर के अनुसार कोलकाता सहित देश के विभिन्न शहरों में रहने वाले खान लोगों को उनके परिजनों को चिंता सता रही है।
तालिबान के खिलाफ बोलने से बचे रहे हैं काबूलीवाले
तालिबान ने भले ही अपगानिस्तान में हुकुमत हासिल की हो लेकिन उसका खौप हाजर किलोमीटर दूर कोलकाता में मौजूद काबूली वाले महसूस कर रहे हैं। आलन यह है कि कई लोग कुछ बोलने से कतरा रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक काबुलीवाले ने बताया कि अगर उन्होंने तालिबान के खिलाफ कुछ कहा और अखबार व टीवी में दिखाया गया तो तालिबान वाले उसके रिश्तेदार को अफगानिस्तान में मार डालेंगे। तालिबान बहुत ही क्रूर संगठन है।
वहीं मैदान इलाके में रहनेवाले
कोलकाता में रहने वाले दिलदार खान ने कहा कि मेरा देश एक और परीक्षा से गुजर रहा है लेकिन हम लड़ाकू कौम हैं और इन ताकतों से लड़ेंगे। मैंने आज अपने छोटे भाई, परिवार और लाखों अफगानियों की सलामती के लिए प्रार्थना की, जिनका भविष्य फिर अनिश्चित हो गया है।
20 साल बाद फिर अफगान‌िस्तान में छाया अंधेरा
याहया गुल कहा कि दो दशक पहले तालिबान की हार के साथ हमें उम्मीद जगी थी कि हमारी मातृभूमि में एक नई शुरुआत होगी। बहुत से युवाओं ने अपने देश में सुनहरे भविष्य के सपने देखने शुरू कर दिए थे। लेकिन अब सबकुछ अनिश्चित नजर आ रहा है। 20 साल बाद एक बार फिर अफगानिस्तान का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
यहां उल्लेखनीय है कि सदियों से अफगान लोग कोलकाता में ड्राई फ्रूट, हींग और कालीन बेचने के लिए आते रहे हैं। अब बहुत से अफगानी ब्याज पर पैसा उधार देने के व्यापार से जुड़े हैं। कोलकाता की कामकाजी आबादी की छोटी अर्थव्यवस्था का यह अटूट हिस्सा बन चुकी है।
बंगाल के भी करीब 200 लोग काबुल में फंसे हुए हैं। वे लोग वतन वापसी का इंतजार कर रहे हैं। दार्जिलिंग के लोकसभा सांसद राजू बिस्ता ने भी विदेश मंत्री एस जयशंकर को दो लोगों के पासपोर्ट और फोन नंबर का ब्यौरा देते हुए एक खत लिखा है। ये नंबर अभी पहुंच से बाहर हैं। दार्जिलिंग में बंदना राय थापा ने भी शिकायत दर्ज कराई है कि काबुल में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने गए उनके पति चंद्र कुमार वहां फंस गए हैं।

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