एक दिन बाद फिर बगावती हुए अर्जुन, संगठन को लेकर किया कटाक्ष

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता: केंद्र सरकार द्वारा कच्चे जूट की मूल्य सीमा हटाये जाने के निर्णय का स्वागत करने के एक दिन बाद ही शुक्रवार को फिर भाजपा सांसद अर्जुन सिंह के बगावती तेवर देखने को मिले। अर्जुन सिंह ने कहा, ‘नेताओं को कुर्सियां दी गयी हैं, लेकिन उसमें पाया (खंभा) नहीं है। कलम दी गयी है मगर उसमें स्याही नहीं है।’ जूट के मुद्दे पर अर्जुन ने कहा कि अब भी उनके दो मांगें पूरी नहीं हुई हैं। कई दिनों से ही जूट उद्योग की बुरी हालत को लेकर भाजपा सांसद केंद्र के खिलाफ मुखर हो रहे हैं। बंगाल के जूट श्रमिकों को लेकर उन्होंने बड़े स्तर पर आंदोलन की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद केंद्रीय कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल ने उन्हें दिल्ली बुलाया था जहां दोनों के बीच बैठक हुई थी। जूट उद्योग को लेकर अर्जुन ने कई शिकायतें इस दौरान की थी। इसके कुछ दिनों बाद ही जूट पर मूल्य सीमा हटा ली गयी थी। इस पर गुरुवार को अर्जुन सिंह ने फैसले का स्वागत किया था। हालांकि अगले ही दिन यानी शुक्रवार को उनके तेवर बदल गये। इस दिन अर्जुन सिंह ने कहा, ‘मूल्य की सीमा हटाना अच्छा कदम है, लेकिन 2 मांगों में से जूट आयोग द्वारा एक ही मांग मानी गयी। टैरिफ कमीशन, प्रोविडेंट फंड, ग्रेच्युटी व बकाया क्या है, इसे देखना होगा।’ प्रदेश भाजपा के संगठन पर एक बार फिर कटाक्ष करते हुए अर्जुन ने कहा, ‘नेताओं को कुर्सियां दी गयी है जिसमें पाया नहीं है। कलम दी गयी है मगर स्याही नहीं है। नड्डा जी को मैंने सब बताया है, देखते हैं वे क्या करते हैं।’ अर्जुन सिंह के एक बार फिर बगावती तेवर के कारण उनकाे लेकर चर्चा तेज है।

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