कोविड-19: महानगर की इस महिला ने मरने के बाद भी देश के लिये पेश की ऐसी मिसाल कि…

कोलकाताः कोलकाता की 93 साल की ट्रेड यूनियन लीडर ज्योत्सना बोस देश की पहली ऐसी महिला बन गई हैं जिनका शरीर मेडिकल रिसर्च के लिए दान किया गया है। इसके जरिए मानव शरीर पर कोरोना वायरस के प्रभाव का पता लगाया जाएगा। बंगाल के एक एनजीओ गणदर्पण ने इसकी जानकारी दी। एनजीओ ‘गणदर्पण’ ने यह भी बताया कि इस तरह के अनुसंधान के लिए शरीर दान करने वाली बोस पश्चिम बंगाल में दूसरी शख्सियत हैं। बोस से पहले संगठन के संस्थापक ब्रोजो रॉय भी अपना शरीर रिसर्च के लिए दान कर चुके हैं। संगठन ने बताया कि कोविड-19 से मौत के बाद उनके शव का एक सरकारी अस्पताल में पैथोलॉजिकल पोस्टमॉर्टम किया गया।

ज्योत्सना के बाद एक और ने किया शरीर दान
ज्योत्सना के बाद कोविड-10 बीमारी से पीड़ित एक अन्य शख्स और नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. विश्वजीत चक्रवर्ती का शव भी अनुसंधान के लिए दान किया गया है और ऐसा करने वाले वह प्रदेश के तीसरे व्यक्ति हुए।

19 साल शरीर दान की थी शपथ
ज्योत्सना बोस की पोती डॉ. तिस्ता बसु ने बताया कि मजबूर नेता को उत्तर कोलकाता के बेलियाघाट इलाके में एक अस्पताल में 14 मई को भर्ती कराया गया था जहां दो दिन बाद उनका निधन हो गया। उन्होंने बताया कि उनकी दादी ने 10 साल पहले संस्था को अपना शरीर दान करने की प्रतिज्ञा ली थी।

 

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