80% ट्यूशन फीस का भुगतान 15 अगस्त तक करना होगा : हाई कोर्ट

कोलकाता : कम की गई ट्यूशन फीस के बकाए का 80 फीसदी भुगतान 15 अगस्त तक अभिभावकों को करना पड़ेगा। इसके साथ ही हाई कोर्ट के जस्टिस संजीव बनर्जी और जस्टिस मौसमी भट्टाचार्या के डिविजन बेंच ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह एफिडेविट दाखिल करके बताए कि निजी स्कूलों पर नियंत्रण के लिए उसके पास कोई कानून है या नहीं। इसके अलावा ट्यूशन फीस नहीं देने के कारण ऑनलाइन एडुकेशन से वंचित कर दिए गए छात्र-छात्राओं को यह सुविधा वापस देनी पड़ेगी।
कटौती की का स्पष्ट ब्योरा दे सरकार
एडवोकेट प्रियंका अग्रवाल ने बताया कि मामले की सुनवायी के दौरान एडवोकेट जनरल ने कहा कि निजी स्कूलों पर नियंत्रण के लिए सरकार के पास कोई रेगुलेटरी ऑथरिटी नहीं है। इसके जवाब में जस्टिस बनर्जी ने आदेश दिया कि वह यह बताए कि सरकार ने इस मामले में अभी तक क्या किया है। डिविजन बेंच ने स्कूलों को आदेश दिया कि लॉकडाउन के मद्देनजर उन्होंने स्कूल फीस में कितनी कटौती की है इसका स्पष्ट ब्योरा दें। इसके साथ ही उन्हें यह भी बताना पड़ेगा कि लॉकडाउन के दौरान उन्होंने शिक्षकों और गैरशिक्षकों के वेतन में कटौती की है या नहीं या किसी को टर्मिनेट किया है या नहीं। अगली सुनवायी 10 अगस्त को होगी। इन मामलो में सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। जस्टिस बनर्जी ने आदेश दिया कि यह जानकारी एफिडेविट के रूप में देनी पड़ेगी।
सभी बोर्डों को अगली सुनवायी में उपस्थित रहना पड़ेगा
गौरतलब है कि विनीत रुइयां ने हाई कोर्ट में यह पीआईएल दाखिल की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि जो बच्चे फीस नहीं दे पाए उन्हें ऑनलाइन एडुकेशन से वंचित कर दिया गया। इन बच्चों के भविष्य का हवाला देते हुए हाई कोर्ट से इस मामले में तत्काल दखल देने की अपील करते हुए यह पीआईएल दायर की गई है। जस्टिस बनर्जी ने इस मामले में सभी बोर्डों को पार्टी बनाये जाने का आदेश देते हुए कहा कि अगली सुनवायी में उन्हें उपस्थित रहना पड़ेगा। निजी स्कूलों में फीस वृद्धि और अन्य फीसों की वसूली को लेकर हाई कोर्ट में कई पीआईएल दायर की गई है।
स्कूलों के लिए जारी की गई ये अपील
इधर राज्य सरकार के प्रमुख सचिव की तरफ से इस मामले में स्कूलों के लिए एक अपील जारी की गई है। राज्य सरकार के प्रमुख सचिव मनीष जैन ने एक नोटिस जारी करके निजी स्कूलों से अनुरोध किया है कि वे 2020-21 के सत्र में ट्यूशन फीस में वृद्धि नहीं करें। इसके अलावा देर से फीस चुकाने के मामले पर भी सहानुभूति के साथ गौर किया जाए। इसके साथ ही लॉक डाउन के दौरान जो सेवाएं नहीं दी गई उनके लिए फीस नहीं वसूली जाए। इसके अलावा फीस नहीं दे पाने के कारण बच्चों को ऑन लाइन कोर्स से वंचित नहीं किया जाए।

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