70% कैब व वाहन बिना सीएफ के दौड़ रही सड़कों पर

प्रदूषण की बढ़ी परेशानी
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाताः शहर में लगभग सभी निजी बसें और 70% से अधिक टैक्सियाँ व बड़ी संख्या में कैब बिना सर्टिफिकेट ऑफ फिटनेस (सीएफ) के ही सड़कों पर दौड़ रही हैं। हालांकि नियमतः सड़क पर उतरने से पहले सीएफ करवाना एक अनिवार्य शर्त है। फिटनेस परीक्षणों से गुजरे बिना, जो वाहन चल रहे हैं, वह न केवल प्रदूषण बढ़ा रहे हैं, ‌बल्कि खतरा भी बढ़ा हुआ है।ऐसे वाहन सड़क-उपयोगकर्ताओं के लिए संभावित खतरे हैं और हानिकारक धुएं के बड़े उत्सर्जक भी हैं। गौरतलब है कि कोविड -19 प्रतिबंधों के कारण, बंगाल सरकार ने सीएफ की वैधता अवधि समाप्त होने पर जुर्माने पर छूट की पेशकश की थी। हालांकि इस सिलसिले में परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि, इसका मतलब यह नहीं है कि बसों और टैक्सियों का फिटनेस परीक्षण नहीं होगा।” एटक समर्थित टैक्सी व ऐप कैब संगठन के नेता नवल किशोर श्रीवास्तव ने कहा कि बड़ी संख्या में वाहन फिटनेस टेस्ट से दूर हैं, ऐसा संभव है। इसकी वजह है कि सीएफ में सरकार ने छूट दे रखी है। हालांकि इस मुद्दे पर जरूरत है कि संबंधित विभाग के अधिकारी कार्रवाई करें। छूट सीएफ नहीं करवाने के लिए नहीं मिली है। शिकायतें आ रही हैं कि बसों के सेकेंड हैंड टायरों में कोई न्यूनतम रोड ग्रिप नहीं है, ब्रेक सिस्टम खराब हो गया है, यांत्रिक दोष बड़े पैमाने पर हैं। ऐसे में इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
“जो बसें डेढ़ महीने से अधिक समय से खुले आसमान के नीचे सड़क पर खड़ी थीं, वे खराब हो गईं और अक्सर सड़कों पर जलभराव होने पर कमर गहरे पानी के नीचे रह जाती हैं। टायर खराब हो गए थे, इंजन खराब हो गए थे, ब्रेक खराब हो गए थे। ये सब सड़क पर होने वाले विनाशकारी हादसों का नुस्खा बनाते हैं। मोटर वाहनों को सड़क पर चलने की अनुमति देने से पहले अनिवार्य सीएफ परीक्षण करना चाहिए। ज्वाइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट के महासचिव तपन बनर्जी ने कहा कि “प्रत्येक बस ऑपरेटर सीएफ परीक्षणों के लिए वाहनों को भेजने से पहले एक बस पर 30,000 रुपये से 40,000 रुपये के बीच कुछ खर्च करता है। बसों को पेंट किया जाता है। ब्रेकिंग सिस्टम की जांच करवानी पड़ती है। बेहतर ग्रिप वाले टायर किराए पर लेना पड़ता है और इंजन के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करना पड़ता है। वर्तमान समय में अधिकांश बस ऑपरेटरों के पास सीएफ करवाने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। हालांकि किन वाहनों का सीएफ हुआ है या नहीं यह सरकार को देखने की जिम्मेदारी है।

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