2 दिनों से 200 लोग करते रहे भोजन का इंतजार

हावड़ा, मालिपांचघड़ा के नस्करपाड़ा इलाके से सामने आई करुण तस्वीर
भूखों की सहायता के लिए सामने आए स्थानीय युवक
सन्मार्ग संवाददाता,हावड़ा : जिला प्रशासन लगातार दावे कर रहा है कि लॉकडाउन के बीच किसी भी परिवार को भूखे नहीं सोने दिया जाएगा। हावड़ा के तीन नंबर वार्ड के रहनेवाले 200 लोग प्रशासन के दावे में एक अपवाद हैं। हावड़ा के मालिपांचघड़ा इलाके के नस्करपाड़ा में पिछले 2 दिनों लोग पानी पी कर रहने को मजबूर है। झुग्गी बस्ती में रहनेवाले लोग रोजाना मजदूरी करनेवाले या कचड़ा चुन उसे बेच अपना गुजारा करनेवाले हैं। लॉकडाउन के बीच उनका रोजगार ठप है। लॉकडाउन के आरंभ में नेता और कुछ संस्थाएं इन्हें खाना पहुंचा देती थी। लेकिन जैसे-जैसे लॉकडाउन की अवधि बढ़ने लगी, ऐसे लोगों की भीड़ कम होने लगी। आरोप है कि इस बीच प्रशासन का एक भी प्रतिनिधि इनकी सुध लेने नहीं पहुंचा है।
पिछले 2 दिनों से कर रहे थे खाने का इंतजार
मालीपांचघड़ा के नस्कर पाड़ा इलाके में 150 से 200 गरीब लोग झुग्गी झोपड़ियों में रहते हैं । यह लोग अपना गुजारा कूड़े करकट को बेचकर, दूसरों से मांग कर करते हैं लेकिन लॉक डाउन में उनके इस साधन को भी छीन लिया । इनके पास केवल भूखे रहने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा। इन गरीबों का कहना है कि लॉक डाउन की शुरुआत में तो कुछ लोग यहां आकर खाना दे जाते थे लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा है, वैसे ही खाना देने वालों की संख्या कम होती जा रही है। ऐसे में पिछले 2 दिन से उन्हें कोई भी खाना देने नहीं आया और यह हाथ में बर्तन लिए इंतजार करते रह गए।
स्थानीय युवक आए मदद के लिए
नस्कर पाड़ा के कुछ युवकों को जब इसकी जानकारी हुई तो कुछ तीन-चार युवक मिलकर इन लोगों के लिए खाने का इंतजाम किया। उसमें ही एक दर्शन जयसवाल ने बताया कि वे कई इलाकों में भोजन वितरण कर रहे हैं लेकिन उन्हें इन झोपड़ियों की जानकारी नहीं थी। उन्हें पता था कि यहां पर कुछ नेता व स्वयंसेवी संस्थाएं भोजन मुहैया करा रही हैं लेकिन वह तो सिर्फ केवल कुछ समय के लिए ही था। ऐसे में इन युवकों ने निर्णय किया कि वे लोग रोजाना इन झोपड़ियों के लोगों को भोजन मुहैया कराएंगे ।
सुबह से ही बर्तन बर्तन लेकर लाइन में लगे रहते हैं गरीब
सुबह सात बजे से ही अपने बर्तन लाइन में लगा देते है ताकि खाना बनने के बाद उनका नंबर पहले आऐ। दरअसल दोपहर एक बजे तक भोजन आता है। अधिकतकर गरीबों को इस दौर में दिन में एक बार ही भोजन मिल रहा है। ऐसे में भोजन पाने के लिए लोगों की भीड़ रहती है। लोग सुबह 8 बजे से ही लाइनों में अपने खाली बर्तन रख देते हैं। इनका कहना है कि यहां शुरू से ही ऐसा होता है। लेकिन पिछले दो दिनों से उनके बर्तन वहां पड़े हैं, कोई भोजन देने नहीं आया। बाद में कुछ लोगों की मदद से उन्हें भोजन मुहैया कराया गया।
कोरोना से नहीं भुखमरी से मर जाएंगे
यहां रह रहे गरीबों का कहना है कि अगर यह युवक उन्हें खाना ना खिलायें तो कोरोना से पहले वे भूख से मर जाएंगे। एक बच्ची को पिछले 2 दिनों से उसकी मां यह लालच दे कर पानी पिला रही थी कि बस कुछ देर में खाना आएगा। इधर, युवकों ने कहा कि वह इन गरीबों को भूखा नहीं मरने देंगे और खाने में इनके लिए दाल भात अंडा, सब्जी मुहैया कराते रहेंगे।

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