2 दिनों के लॉकडाउन में है वैज्ञानिक दृष्टिकोण

कोलकाताः हाल के दिनों में किए जा रहे लॉकडाउन की तिथि को लेकर काफी हो-हल्ला मचा है। हालांकि, यह लॉकडाउन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही किया जा रहा है। राज्य में कोरोना वायरस के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में इसके नियंत्रण को लेकर ठोस उपाय किए जा रहे हैं। यही वजह है कि सरकार अपने एक्सपर्ट से बात करके ही ऐसे उपाय कर रही है। इस बीच लॉकडाउन की अलग-अलग तिथियां घोषित होने को लेकर भी काफी लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे में इसे समझना जरूरी है कि कई देशों ने इसी प्रकार के नियम अपनाकर कोरोना नियंत्रण करने में काफी हद तक कामयाबी हासिल की है। अब देखने वाली बात यह है कि राज्य में अलग-अलग तिथियों में होने वाले लॉकडाउन का कितना असर पड़ता है।

 यह एक प्रकार से प्रायोगिक परीक्षण : डॉ. पाण्डेय

डॉ. राजीव पाण्डेय, एनेस्थिया ने कहा कि यह एक प्रकार से प्रायोगिक परीक्षण भी कहा जा सकता है, जो कि वैज्ञानिक तरीके पर आधारित है। इसी पद्धति को केंद्र कर सप्ताह में दो या तीन दिन का संपूर्ण लॉकडउन करके कुछ देशों ने कुछ हद तक कोरोना पर नियंत्रण हासिल किया है। जब तक आपके पास वैक्सीन नहीं आ जाती तब तक ऐसे ही कदम उठाने को हम बाध्य हैं। सरकार के उठाए कदम का हमें स्वागत करने की जरूरत है।
60% मास्क पहनने वाले लोग 90% लोगों को कोरोना से बचाने में कारगर
डॉ. राजीव पाण्डेय ने कहा कि यदि 60 % लोग मास्क सही तरीके से पहनते हैं, तो वह 90 % लोगों को कोरोना से बचा सकते हैं। इसके अलावा अब भी लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ.दीपक कपूर ने कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क लगाना, सैनिटाइजेशन अब भी कोरोना नियंत्रण में कारगर उपाय हैं। कोरोना का सही इलाज या वैक्सीन जब तक हमारे पास नहीं आती हमें जागरूक रहकर काम करना होगा।

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