15 हजार करोड़ रुपये के साम्राज्य का मालिक है ‘लाला’

कोलकाता से लेकर दिल्ली तक फैला रखा है व्यवसाय
कोलकाता : वर्ष 2018 में दक्षिण भारत में अवैध गोल्ड माइंस के ऊपर केजीएफ नामक फिल्म बनायी गयी थी। उस फिल्म की पटकथा कुछ हद तक बंगाल के कोयला कारोबारी अनूप माझी उर्फ लाला के जीवन की कहानी से मिलती-जुलती है। केन्द्रीय एजेंसियों की मानें तो 42 साल की उम्र में लाला ने अवैध कोयला कारोबार से 15 हजार करोड़ रुपये का साम्राज्य कायम किया है। लाला के साम्राज्य खड़ा करने की कहानी भी किसी बॉलीवुड फिल्म की कहानी से कम नहीं है। लाला इस वक्त केन्द्रीय एजेंसियों के रडार पर है। शनिवार को सीबीआई की विभिन्न टीमों ने कोलकाता, दुर्गापुर, आसनसोल, पुरुलिया, रानीगंज, पटना, बलिया सहित देशभर में 40 ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान लाला और उसके साथियों की कई संपत्तियों को सीबीआई ने सील कर दिया। इसके अलावा उनके ठिकानों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए।
धनबाद पुलिस ने सबसे पहले पकड़ा अवैध कोयला लदा ट्रक
धनबाद के एसएसपी असीम विक्रांत मिंज की अगुवाई में धनबाद पुलिस की टीम ने अवैध कोयला माफियाओं को पकड़ने के लिए एक योजना बनायी । धनबाद पुलिस की टीम ने जिस सड़क से अवैध कोयला लेकर ट्रक गुजरते थे उस पर एक फर्जी ट्रैफिक जाम तैयार किया। ऐसे में जैसे ही अवैध कोयला लेकर ट्रक वहां पहुंचे पुलिस की टीम ने ड्राइवर और हेल्पर को पकड़ कर ट्रकों को जब्तकर लिया। ड्राइवरों से पूछताछ करने पर पुलिस को पता चला कि वे लोग उक्त कोयला रानीगंज, पांडवेश्वर, और जामुड़िया के विभिन्न जगहों से खनन कर यूपी ले जा रहे हैं। इसके बाद धनबाद पुलिस की मदद से केन्द्रीय एजेंसियों को उक्त अवैध कारोबार के बारे में पता चला।
गरीबी में बीता बचपन
सूत्रों के अनुसार अनूप माझी उर्फ लाला की परवरिश आसनसोल के सालानपुर इलाके में हुई है। उसका जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था। उसके परिवार में चार भाई और तीन बहनें थीं। पुरुलिया जिले के रघुनाथपुर सब डिव‌िजन के नेतुरिया ब्लॉक में एक छोटे से कस्बे पारबेलिया में लाला का जन्म हुआ था।
लाला ने अपने इलाके में एक मछली विक्रेता के तौर पर काम शुरू किया। बचपन से ही अमीर बनने की चाहत लिए लाला ने कुछ पूंजी इकट्ठी की और अपने चार दोस्तों के साथ मिलकर कोल ब्रिकेट मैन्युफैक्चरिंग का कारखाना लगाया। पारबेलिया इलाके में मौजूद कोयला हाई ग्रेड का होता है। पूरे देश में इस कोयले की अच्छी डिमांड है और यह प्रीमियम पर बिकता है। इस कोयले की खासियत यह है कि यह जमीन के अंदर ज्यादा गहराई में नहीं होता है। इसके बाद अनूप ने कोयला चोरी का काम चालू कर दिया। इसके बाद उसने खुद की ओपन कास्ट माइन शुरू कर दी। यह रघुनाथपुर के जंगलों में थी। जल्द ही बड़ी संख्या में स्थानीय लड़के माझी के साथ जुड़ गए और वह एक स्थानीय हीरो बन गया।
कारोबारी सल्तनत का निर्माण
सूत्रों के अनुसार माझी 22 इंडस्ट्रियल यूनिट्स का मालिक है। इनमें दुर्गापुर और आसनसोल में स्पॉन्ज आयरन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, रोलिंग मिल्स, सिलिकेट फैक्ट्रियां और हार्ड कोक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स शामिल हैं। वह दो हॉलिडे रिजॉर्ट्स का भी मालिक है और कोलकाता व दिल्ली में उसकी कई प्रॉपर्टीज हैं । इस पूरे कारोबार के केंद्र में लाला है।
फलता-फूलता अवैध कारोबार
स्थानीय सूत्रों के अनुसार आसनसोल-रानीगंज इलाके में करीब 3,500 अवैध कोल खदानें हैं। इनमें 55,000 से ज्यादा लोग प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। करीब 40,000 लोगों की आजीविका अप्रत्यक्ष रूप से इस कारोबार पर टिकी हुई है । इस अवैध कारोबार का रोजाना का टर्नओवर करीब 200 करोड़ रुपये का है। आसनसोल और इसके आसपास के इलाकों में इस धंधे को एक समानांतर अर्थव्यवस्था के तौर पर माना जाता है।
सभी टैक्स और उपकर मिलाकर कोयले की आधिकारिक कीमत करीब 10,000 रुपये प्रति टन है। दूसरी ओर अवैध कोयले, जो कि डिस्को कोल के नाम से मशहूर है, की बिक्री 6,000 से 7,500 रुपये प्रति टन पर होती है।

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