कोलकाता में उतरेंगी 1180 ई-बसें, समझौते पर हस्ताक्षर

500 एसी और 680 नॉन-एसी बसें चलायी जायेंगी
हम रहें या ना रहें, काम होता रहेगा : फिरहाद
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंग परिवहन निगम के अधीन निजी मालिकाना में कोलकाता की सड़कों पर 1180 इलेक्ट्रिक बसें उतर रही हैं। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय के फास्टर अडॉप्शन ऑफ मैन्यूफैक्चरिंग (हाइ​​ब्रिड) ऑफ इलेक्ट्रिक ह्वीकल्स अथवा फेम-टू परियोजना में परिवेश अनुकूल ये बसें उतारी जायेंगी। बुधवार को राज्य सरकार के परिवहन विभाग और टाटा मोटर्स लिमिटेड के बीच इस बाबत समझाैते पर हस्ताक्षर किया गया जो मौजूदा समय का सबसे बड़ा करार है। ऑपेक्स मॉडल के तहत इन बसों के संचालन व मेंटेनेंस का कार्य निर्माणकर्ता द्वारा किया जायेगा। फेम-टू परियोजना के तहत शहर में ऑपेक्स मॉडल की इलेक्ट्रिक बसों का संचालन कोलकाता में पहले ही किया जा चुका है और प्राइवेट ऑपरेटरों द्वारा 50 ई-बसें फिलहाल संचालित की जा रही हैं। इस साल के अंत तक 400 ई-बसों के सड़कों पर उतरने की उम्मीद है और बाकी 800 ई-बसें अगले साल यानी 2023 के अंत तक उतरेंगी। 12 मीटर लंबाई वाली 150 एसी बसें और 250 नॉन-एसी बसें इस मौजूदा योजना के तहत चलायी जायेंगी। इसके अलावा शहर के विभिन्न रूटों में 9 मीटर की 350 एसी बसें और 9 मीटर की 400 नॉन-एसी बसें चलेंगी। नियमों के अनुसार, 12 मीटर लंबी प्रत्येक ई-बसों के लिए दैनिक 192 कि.मी. और 9 मीटर लंबी बसों के क्षेत्र में दैनिक 165 कि.मी. किराया राज्य को देना होगा। इतने कि.मी. बस नहीं चलने पर भी किराया देना होगा। प्रति कि.मी. किराया एसी बस के क्षेत्र में 41 रु. 14 पैसे तय किया गया है। वहीं नॉन-एसी बसों में प्रति कि.मी. 35 रुपये किराया होगा। इस हिसाब से निगम को प्रत्येक एसी ई-बस के लिए हर महीने 2 लाख 5 हजार रुपये से 2 लाख 40 हजार रुपये तक देने होंगे। नॉन-एसी होने पर ये किराया कम होकर महीने में 1 लाख 75 हजार रुपये से 2 लाख 3 हजार रुपये होगा। टिकट बिक्री के रुपये टाटा मोटर्स नहीं लेगा बल्कि राज्य सरकार इसे लेगी। राज्य सरकार द्वारा प्रति कि.मी. की रेट दी जायेगी और ड्राइवर व कंडक्टर भी वेेस्ट बंगाल ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (डब्ल्यूबीटीसी) द्वारा दिया जायेगा। इस दिन आयोजित कार्यक्रम में राज्य के परिवहन मंत्री फिरहाद हकीम, डब्ल्यूबीटीसी के एमडी राजनवीर सिंह कपूर, परिवहन विभाग के प्रधान सचिव विनोद कुमार, परिवहन विभाग के डायरेक्टर दिव्येंदु दास, कनवरजेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (सीईएसएल) की एमडी महुआ आचार्य समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे। सीईएसएल के सबसे बड़े टेंडर यानी 5 मेट्रो शहरों बंगलुरु, दिल्ली, सूरत, हैदराबाद और कोलकाता में 5450 ई बसों के संचालन के तहत यह समझौता किया गया है। इस दौरान फिरहाद हकीम ने कहा, ‘हमारा उद्देश्य कोलकाता को दुनिया के सबसे स्मार्ट शहरों में शामिल करना है और इस तरह के अपग्रेडेशन के लिए सामूहिक परिवहन सबसे अहम है। कार्बन से मुक्ति और मोबिलिटी के लिए यह दिन अत्यंत अहम है। बसों की पहली खेप इस साल के अंत तक आ जायेगी।’ उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक विभिन्न चरणों में ईंधन युक्त परिवहन को फेज आउट करने का निर्णय लिया है। इस दौरान सीईएसएल की एमडी व सीईओ महुआ आचार्य ने कहा, ‘इस पहल के लिए हम डब्ल्यूबीटीसी के प्रति कृतज्ञ हैं और उम्मीद है कि इससे राज्य सरकार के प्रदूषण मुक्ति के उद्देश्य को मदद मिलेगी। इस परियोजना को पूरा करने के लिए सीईएसएल द्वारा टाटा मोटर्स के साथ मिलकर काम किया जायेगा।’

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