103 दिनों के इंतजार के बाद खुला को­लकाता का ऐतिहासिक काॅफी हाउस

मधु सिंह, कोलकाता : कवियों से लेकर लेखकों, पेंटरों और कलाकारों के लिए समय बिताने की फेवरेट जगह कॉलेज स्ट्रीट का कॉफी हाउस 103 दिनों के लॉकडाउन के बाद आखिरकार गुरुवार से खुल गया। सुबह 11 बजे कॉफी हाउस के दरवाजे खुलने के कुछ देर में ही लगभग 25 ग्राहक आये और शाम तक संख्या 250 पहुंंची। काेई 50 वर्षों से यहां आ रहा है तो कोई शादी की सालगिरह मनाने के लिए आया। लॉकडाउन में डिप्रेशन शिकार कुछ लोग तरोताजा होते दिखे।
कम किये गये 50% टेबल
सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखने के लिए पहले की तुलना में 50% टेबल भी कम कर दिये गये हैं। गेट पर सबसे पहले टेम्परेचर चेक किया जा रहा है। बगैर मास्क के नो एंट्री। अंदर जाने पर हाथों को सैनिटाइज करवाया जा रहा है।
कांच की जगह ली कागज ने
लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कॉफी हाउस में कांच के ग्लास और प्लेट क़े स्थान पर कागज का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं सभी टेबलों में मेन्यू चार्ट देने के बजाय अब चार्ट की लिस्ट चिपका दी गयी है।

 

समृद्ध है कॉफी हाउस का इतिहास
लगभग 144 वर्ष पुराना कॉफी हाउस सत्यजीत रे, मृणाल सेन और अपर्णा सेन से लेकर कई महान लेखक ऋत्विक घटक, नारायण गंगोपाध्याय, सुनील गंगोपाध्याय, संजीव चट्टोपाध्याय, समरेश मजुमदार, सुभाष मुखाेपाध्याय, शक्ति चट्टोपाध्याय जैसों की प्रतिभा का गवाह बना है। 20वीं सदी तक कॉफी हाउस बुद्धिजीवियों का सेकेंड होम था। अपने अड्डा और नॉस्टैलजिया के लिए यह हर वर्ग के लोगों की पसंद बन गया और आज भी है।
मानी जा रही है सोशल डिस्टेंसिंग, घटाई गई 50 प्रतिशत सीटें
खुश हैं अानेवाले..दमदम से कॉफी हाउस में आने वाली ग्राहक लिम्पिया ने कहा, ‘इतने दिन से घर पर थे और कॉफी हाउस की बात ही कुछ अलग है।’ वहीं बिराटी से आयी मुनमुन ने कहा, ‘अक्सर कॉफी हाउस आती हूं। पहले काफी भीड़ होती थी, बैठने की जगह नहीं होती थी, अभी काफी सूना है मगर यहां आकर अच्छा लगा कर्मियों के चेहरे भी खिले कैशियर जाहिद हुसैन ने कहा 2 से 3 गज की दूरी पर टेबल बिछायी गयी है। बगैर मास्क के कॉफी नहीं दी जा रही है। इतने दिनों के बाद कॉफी हाउस खोलकर काफी अच्छा लग रहा है।
20 साल पहले कॉफी हाउस में हुअा था प्यार, अब आये सालगिरह मनाने कॉफी हाउस में एक ऐसा दंपति आया जिनका अफेयर 20 साल पहले कॉफी हाउस में हुआ था। उन्होंने कहा कि हमारी 19वीं साल​गिरह है और 20 वर्ष पहले हमारा अफेयर यहां हुआ था। हर साल 2 जुलाई को हम यहां आते हैं।

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